बरेली: नया नहीं है घर से भागे जोड़ों का निकाह न पढ़ाने का ऐलान

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बरेली, अमृत विचार। शुक्रवार को दरगाह आला हजरत से एक एक ऐलान किया गया था। दरगाह परिसर के आसपास बैनर, पोस्टर लगाकर यह बात ऐलानिया कही गई कि दरगाह आला हजरत के अहाते, दारूल उलूम मंजरे इस्लाम, रजा मस्जिद, अफ्रीकी हास्टल और इनसे संबंधित दफ्तरों में या यहां के स्टाफ के द्वारा कोई निकाह नहीं …

बरेली, अमृत विचार। शुक्रवार को दरगाह आला हजरत से एक एक ऐलान किया गया था। दरगाह परिसर के आसपास बैनर, पोस्टर लगाकर यह बात ऐलानिया कही गई कि दरगाह आला हजरत के अहाते, दारूल उलूम मंजरे इस्लाम, रजा मस्जिद, अफ्रीकी हास्टल और इनसे संबंधित दफ्तरों में या यहां के स्टाफ के द्वारा कोई निकाह नहीं पढ़ाया जाता है। दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां के हवाले से कहा गया कि खासकर घर से भाग कर आये लड़के-लड़कियों के निकाह पर सख्ती से पाबंदी है।

दरगाह के प्रशासनिक अधिकारी हाजी जावेद ने बताया कि यह कोई नया फैसला नहीं है। सुब्हानी मियां के वालिद और पूर्व सज्जादानशीन रेहान रजा खां रहमानी मियां के जमाने से दरगाह पर यहां निकाह पढ़ाने पर पाबंदी है। उन्होंने कहा कि प्रेमी जोड़ों का निकाह तो हरगिज नहीं पढ़ाया जाता है। सवाल यह खड़ा होता है कि अगर यह फरमान इतना ही पुराना है तो एक बार फिर क्यों दरगाह की तरफ से जोर-शोर के साथ दोबारा इसको प्रचारित किया जा रहा है।

दरअसल, धर्मांतरण और निकाह पढ़ाने के एक मामले में जांच के लिए बीते दिनों दरगाह पर पुलिस पहुंची थी जिसमें दरगाह के जिम्मेदारान की तरफ से यह बताया गया था कि उनके यहां निकाह नहीं पढ़ाया जाता। अब दरगाह के जिम्मेदारान की तरफ से कहा गया है कि दरगाह आला हजरत के अहाते, दारूल उलूम मंजरे इस्लाम, रजा मस्जिद, अफ्रीकी हास्टल और इनसे संबंधित दफ्तरों में किसी ने अगर निकाह पढ़ाया या यहां निकाह पढ़ाए जाने का झूठा आरोप लगाया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों की मानें तो दरगाह से हटकर आसपास कई जगह लोग निकाह पढ़ाते हैं। इनमें अधिकतर प्रेमी जोड़े ही होते हैं। पैसों के लालच में कई मौलवियों द्वारा इधर-उधर निकाह पढ़ाया जाता है। इस सवाल के जवाब में दरगाह से जुड़े जिम्मेदारान कहते हैं कि हर किसी की तो जिम्मेदारी तो नहीं ली जा सकती।

सूत्रों की मानें तो मोहल्ला सौदागरान और उसके आस-पास तो ऐसे बहुत सारे लोग मंडराते रहते हैं जो निकाह के दौरान पैसों के लालच में गवाह तक बनने को तैयार हैं। गवाह बनने वालों में अधिकतर आसपास के दुकानदार या वहां काम करने वाले लोग होते हैं। इनके सिर पर किसका हाथ है, यह बताने को कोई तैयार नहीं है।

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