कम दिलचस्प नहीं है भूपेंद्र पटेल का सियासी सफर, जानिए कैसे नगर निकाय स्तर के नेता से पहुंचे मुख्यमंत्री पद तक
अहमदाबाद। गुजरात में रविवार को सर्वसम्मति से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल के नेता चुने गये पहली बार के विधायक भूपेंद्र पटेल को मृदुभाषी कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने नगर पालिका स्तर के नेता से लेकर प्रदेश की राजनीति में शीर्ष पद तक का सफर तय किया है। पटेल (59) मुख्यमंत्री …
अहमदाबाद। गुजरात में रविवार को सर्वसम्मति से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल के नेता चुने गये पहली बार के विधायक भूपेंद्र पटेल को मृदुभाषी कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने नगर पालिका स्तर के नेता से लेकर प्रदेश की राजनीति में शीर्ष पद तक का सफर तय किया है। पटेल (59) मुख्यमंत्री के रूप में विजय रूपाणी की जगह लेंगे। उन्होंने 2017 में पहली बार राज्य की घाटलोडिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और 1.17 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की, जो उस चुनाव में एक रिकॉर्ड था।
अपने समर्थकों के बीच ‘दादा’ के नाम से पुकारे जाने वाले भूपेंद्र पटेल को गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री तथा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का करीबी माना जाता है। वह जिस विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं, वो गांधीनगर लोकसभा सीट का हिस्सा है, जहां से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सांसद हैं। पटेल 2015 से 2017 तक अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (एयूडीए) के अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पहले वह 2010 से 2015 तक गुजरात के सबसे बड़ी शहरी निकाय अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे थे।
पटेल को करीब से जानने वाले लोग उन्हें जमीन से जुड़ा नेता बताते हैं, जो लोगों से चेहरे पर मुस्कान के साथ मिलते हैं। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाले पटेल विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे और अहमदाबाद जिले की मेमनगर नगरपालिका के सदस्य रहे और दो बार इसके अध्यक्ष बने। वह पाटीदार समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास को समर्पित संगठन सरदारधाम विश्व पाटीदार केंद्र के न्यासी भी हैं।
पेशे से बिल्डरपटेल का जन्म अहमदाबाद में 15 जुलाई 1962 को हुआ था। वह गुजरात की राजनीति में निर्णायक माने जाने वाले समुदायों में से एक पाटीदार समुदाय की कई बड़ी संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। पटेल उस सरदारधाम ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं जिसके भवन का उद्घाटन अहमदाबाद में ऑनलाइन कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
उसी कार्यक्रम के बाद रूपाणी ने अचानक इस्तीफ़ा दे दिया था। वह ऐसी एक अन्य संस्था विश्व उमिया फ़ाउंडेशन की स्थायी समिति के भी अध्यक्ष हैं। विधायक चुने के बाद उन्हें अहमदाबाद शहरी विकास सत्तामंडल (औडा) का अध्यक्ष भी बनाया गया था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा भी हासिल किया था।
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