बरेली: आरटीआई से नहीं मिल रही स्मार्ट सिटी की सूचनाएं
बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी बसाने के लिए करोड़ों रुपये की कार्ययोजना तो चल रही है लेकिन उनमें पारदर्शिता लाने के लिए जनसूचना अधिकार के सिस्टम को मजबूत नहीं किया गया है। इससे स्मार्ट सिटी की कार्ययोजनाओं को लेकर लोगों को आरटीआई के तहत सूचनाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसे लेकर पूर्व में आरटीआई …
बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी बसाने के लिए करोड़ों रुपये की कार्ययोजना तो चल रही है लेकिन उनमें पारदर्शिता लाने के लिए जनसूचना अधिकार के सिस्टम को मजबूत नहीं किया गया है। इससे स्मार्ट सिटी की कार्ययोजनाओं को लेकर लोगों को आरटीआई के तहत सूचनाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसे लेकर पूर्व में आरटीआई कार्यकर्ता मुहम्मद जिलानी सहित कई लोग लिखित तौर से आपत्ति भी जाहिर कर चुके हैं। बावजूद इसके अफसर इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत मिशन व अमृत योजना के तहत बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड को आवंटित करोड़ों की धनराशि गैर योजनाबद्ध तरीके से बेजा इस्तेमाल की जा रही है। इस प्रोजेक्ट में गड्ढा मुक्त सड़कें, जल निकासी, सीवरेज सिस्टम और शुद्ध पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जबकि कई करोड़ रुपये दूसरे कामों में खपाया जा रहा है।
ऐसे में लोग टूटी सड़कें, दूषित पेयजल आपूर्ति से नागरिक परेशान हैं। मुहम्मद जिलानी ने पहले भी सवाल उठाते रहे हैं कि आरटीईआई 2005 में लागू होने के बावजूद शासन द्वारा करोड़ों रुपयों के आवंटन, खर्च और विकास कार्यों का जागरूक नागरिकों द्वारा ब्योरा मांगने के संवैधानिक अधिकार के तहत बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने आरटीआई तंत्र विकसित नहीं किया है। ऐसे में जनसूचनाएं लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
कार्यकर्ता खालिद जिलानी का कहना है कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर कई बार सूचनाएं मांगी गई हैं। कई बार आरटीआई भी लगाई गई है लेकिन जानकारी नहीं मिल पा रही है। जबकि उन्होंने नगर निगम पहुंचकर यह जानकारी भी मांगी थी कि स्मार्ट सिटी परियोजना में जनसूचना अधिकारी कौन है, जिसकी भी सूचना नहीं मिल सकी है। जबकि नगर निगम के अधिकारी इस पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं।
