बरेली: अध्यक्ष बनने को डा. विनोद और डा. राजीव के बीच मुकाबला

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बरेली, अमृत विचार। त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बनने के बीच मंगलवार की देर रात आईएमए का चुनाव और दिलचस्प मोड़ पर आ गया। अब अध्यक्ष पद पर दो ही प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला रह गया। तीन प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद डा. विनोद पगरानी और डा. राजीव अग्रवाल ही मैदान में हैं। …

बरेली, अमृत विचार। त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बनने के बीच मंगलवार की देर रात आईएमए का चुनाव और दिलचस्प मोड़ पर आ गया। अब अध्यक्ष पद पर दो ही प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला रह गया। तीन प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद डा. विनोद पगरानी और डा. राजीव अग्रवाल ही मैदान में हैं। अध्यक्ष पद पर तीन और उपाध्यक्ष सहित अन्य पदों पर नामांकन करा चुके कई प्रत्याशियों ने अपना नाम वापस ले लिया। 19 सितंबर को आईएमए का चुनाव है।

आईएमए चुनाव में 10 से 14 सितंबर तक चली नामांकन वापसी की प्रक्रिया के बाद मंगलवार देर रात प्रत्याशियों के नामों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। अध्यक्ष पद पर पांच दावेदारों में से सिर्फ दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रह गया। अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल डा. राजीव गोयल पहले ही अपना नाम वापस ले चुके हैं।

अब अध्यक्ष पद से डा. डीपी गंगवार, डा. राघवेन्द्र शर्मा ने भी नाम वापस ले लिया है। उपाध्यक्ष पद के लिये कुल चार प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रहेगा, जबकि छह प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया था। सचिव के लिए डा.मुरलीधर छाबड़िया और कोषाध्यक्ष पद पर डा. आदित्य माहेश्वरी को निर्विरोध घोषित कर दिया है। पीआरओ के लिए भी 3 प्रत्याशियों ने पर्चा भरा था। इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। मेंबर स्टेट काउंसिल के लिए 18 लोगों ने नामांकन कराया था। सिर्फ 16 प्रत्याशी ही मैदान में हैं।

मेंबर एक्सक्यूटिव कमेटी के लिए 61 प्रत्याशी ने नामांकन कराया था, जबकि अंतिम दिन तक यह संख्या घटकर 49 रह गई है। चुनाव अधिकारी डा. रवीश अग्रवाल ने बताया कि नामांकन वापसी की प्रक्रिया सपन्न हो गयी। उपरोक्त पदों पर ही प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला होगा।

अपनों को जिताने के लिए खींचे कदम
तीन प्रत्याशियों ने अपनों को जिताने के लिए अध्यक्ष पद से नाम वापस लिया है। इसमें राजीव गोयल का नाम पहले ही सामने आ गया कि वह डा. विनोद पागरानी के समर्थन में नाम वापस ले रहे हैं लेकिन डा. डीपी गंगवार, डा. राघवेन्द्र शर्मा के नाम वापस लेने के पीछे तमाम कयास लगाए जा रहे हैं।

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