लखीमपुर खीरी: घोड़े को बाघ ने बनाया निवाला, ग्रामीण दहशत में
मैलानी खीरी, अमृत विचार। बफर जोन मैलानी रेंज के जंगल से निकले बाघ ने सुआबोझ के निकट एक ईंट भट्टे के पास घास चर रहे एक घोड़े पर हमला कर उसे मार डाला और शव को खींचकर गन्ने के खेत में ले गया सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों ने मौका मुआयना किया है। ग्राम पंचायत …
मैलानी खीरी, अमृत विचार। बफर जोन मैलानी रेंज के जंगल से निकले बाघ ने सुआबोझ के निकट एक ईंट भट्टे के पास घास चर रहे एक घोड़े पर हमला कर उसे मार डाला और शव को खींचकर गन्ने के खेत में ले गया सूचना पर पहुंचे वन कर्मियों ने मौका मुआयना किया है।
ग्राम पंचायत खरेटा के ग्राम राजेपुर निवासी मोसीन ने बताया कि शनिवार की सुबह लगभग 6:30 बजे अपने घोड़े को उमर के भट्टे के पास खाली पड़े फड़ में घास चरने के लिए बांधकर आया था। कुछ देर बाद भट्टे के मजदूरों ने बताया की गन्ने के खेत में से निकले बाघ ने घोड़े को मार डाला है। सूचना पर ग्रामीणों के साथ वह मौके पर पहुंचा तो मुजीब के गन्ने के खेत के अंदर घोड़े का शव पड़ा दिखाई दिया जिसकी गर्दन कटी हुई थी।
मोसीन ने इसकी सूचना पुलिस और वन कर्मियों को दी सूचना पाकर वन रेंजर के पी सिंह ने वन दरोगा सुरेश सिंह वनरक्षक अरुण कुमार आदि को मौके पर भेजा वन कर्मियों ने घोड़े के शव को पास में ही गड्ढा खोदकर दफन करवा दिया। घटनास्थल के पास बाघ के पदचिन्ह मिले हैं।
रेंजर ने बताया कि बाघ की निगरानी कराई जा रही है । उन्होंने ग्रामीणों से जंगल के किनारे और खेतों में जाने से मना किया है। किसान अगर खेतों में जाएं भी तो इकट्ठा होकर पीपा आदि बजाकर सोरगुल करते हुए खेतों में जाएं। ताकि किसानों को कोई जनहानि ना हो सके। कार्यवाहक पशु चिकित्सा अधिकारी मैलानी डॉ राजेंद्र प्रताप ने घोड़े मौत बाघ के हमले से होना बताया है।
मोसिन के सामने गहराया रोजी, रोटी का संकट
घोड़े की मौत हो जाने से मोसिन के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।क्योंकि घोड़ा ही उनकी रोजी रोटी का मात्र एक साधन था। मोसिन घोड़े के सहारे ही भट्टे पर ईट ढोकर परिवार का पालन पोषण करता था। भट्टे पर काम करके परिवार का पालन पोषण करता था। घोड़े के मर जाने से मोसिन के परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है।
