रामपुर: छेड़खानी के आरोपी कोचिंग संचालक की जमानत खारिज
रामपुर, अमृत विचार। छेड़खानी के आरोपी कोचिंग संचालक आलोक कुमार सक्सेना को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुनवाई के बाद अपर जिला जज विशेष न्यायधीश पोस्को एक्ट की कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी है। गौरतलब है कि शिक्षक दिवस से एक दिन पहले सिविल लाइंस थाना क्षेत्र स्थित एक कोचिंग में संचालक द्वारा …
रामपुर, अमृत विचार। छेड़खानी के आरोपी कोचिंग संचालक आलोक कुमार सक्सेना को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुनवाई के बाद अपर जिला जज विशेष न्यायधीश पोस्को एक्ट की कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी है। गौरतलब है कि शिक्षक दिवस से एक दिन पहले सिविल लाइंस थाना क्षेत्र स्थित एक कोचिंग में संचालक द्वारा शिक्षक दिवस मनाया गया था। इस दौरान एक छात्रा के मुंह पर जबरन केक लगाया था। छात्रा चीखती रही, लेकिन सहयोगी छात्रों ने भी उसको नहीं बचाया। जिसका वीडियों 10 सितंबर वायरल हुआ था। इस मामले में सिविल लाइंस थाने में छात्रा के पिता की ओर से छेड़खानी और पोस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया था। जेल में बंद शिक्षक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत अर्जी दाखिल की थी।
जिस पर बुधवार को अपर जिला जज विशेष न्यायधीश पोस्को एक्ट नीलू मोघा की कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तर्क दिए कि आरोपी शिक्षक को रंजिशन फंसाया गया है उसने कोई अपराध नहीं किया है और घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है जबकि अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि आरोपी ने गुरु और शिष्य के रिश्तों को कंलकित किया है और पीड़िता द्वारा अपने बयानों में भी कहा गया है जिसके साक्ष्य पत्रावली पर मौजूद है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायधीश नीलू मोघा ने आरोपी शिक्षक और कोचिंग संचालक आलोक कुमार सक्सेना जमानत खारिज कर दी है।
कोर्ट ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता की लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा बहस के दौरान कई बार पीड़िता की पहचान उजागर करने पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई और अभियोजन ने भी अपनी बहस में इस बात का उल्लेख किया कि पीड़िता का नाम उजागर नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट परिसर में जमे रहे भाजपाई
बुधवार को आरोपी शिक्षक आलोक कुमार सक्सेना की साढ़े बारह बजे जमानत पर कोर्ट में सुनवाई चल रही। इस दौरान भाजपा के कई नेता कोर्ट परिसर में जमे रहे हैं लगातार अपने अधिवक्ताओं से संपर्क करते देखे गए। जबकि थाने में भी इन नेताओं ने आरोपी को छ़ुड़ाने की कोशिश की थी। पुलिस की सख्ती के आगे एक नहीं चल सकी।
छात्र-छात्राओं के शपथ पत्र कोर्ट में दिखाए
बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कोचिंग सेंटर में कोई घटना नहीं हुई है वहां पर मौजूद छात्रों ने सीओ सिटी को इस तरह के शपथ पत्र दिए हैं। जिसको कोर्ट ने देखा।
सुनवाई के दौरान आशाराम बापू का भी दिया हवाला
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बहस के दौरान आरोपी की उम्र और संभ्रांत नागरिक होने का हवाला दिया। जिस पर अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि आशाराम बापू भी काफी उम्र के हैं। उनके द्वारा भी अपराध किया गया है, तो शिक्षक क्यो नहीं कर सकता।
कोचिंग में पढ़ने वाले कुछ छात्र-छात्राओं के हलफनामे आए हैं। जिसकी विधिक जांच की जा रही है। -श्रीकांत प्रजापति, सीओ सिटी
