लखीमपुर-खीरी: जितिन प्रसाद के मंत्री बनाए जाने से जिले के लोगों में उत्साह
लखीमपुर-खीरी, अृमत विचार। कभी जिले की राजनीति में अह्म भूमिका में रहने वाले जितिन प्रसाद को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाए जाने से उनके समर्थकों में उत्साह है। भाजपा भी इसे पार्टी की मजबूती के रूप में देख रही है वहीं धौरहरा क्षे़त्र के अलावा सीतापुर जिले तथा शाहजहांपुर में जितिन प्रसाद प्रभाव रखते है। …
लखीमपुर-खीरी, अृमत विचार। कभी जिले की राजनीति में अह्म भूमिका में रहने वाले जितिन प्रसाद को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाए जाने से उनके समर्थकों में उत्साह है। भाजपा भी इसे पार्टी की मजबूती के रूप में देख रही है वहीं धौरहरा क्षे़त्र के अलावा सीतापुर जिले तथा शाहजहांपुर में जितिन प्रसाद प्रभाव रखते है। जिले में राजनैतिक गलियारों में कुछ चर्चाएं भी इसी तरह की है। जिले में धौरहरा क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
जितिन प्रसाद जहां शाहजहांपुर में पैत्रक विरासत के कारण अपनी अच्छी पैठ रखते हैं वहीं कांग्रेस की तरफ से जिले में दो बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे। जितिन प्रसाद जिले के धौरहरा क्षेत्र को ही अपना कार्य क्षेत्र बनाना चाहते थे। धौरहरा क्षेत्र में सीतापुर का भी कुछ क्षेत्र आता है। हालांकि मोदी लहर में वे अपना आस्तित्व नहीं बचा पाए।
इस बीच कांग्रेस भी अपनी पुुरानी स्थिति बनाए रखने में असफल रही। कांग्रेस की असफलता के साथ ही शुरू हुए मतभेदों के दौर ने जितिन प्रसाद को हासिये पर ला दिया। आखिर उन्हें भाजपा का दामन थामना पड़ा। जब जितिन प्रसाद इस्पात मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री बने उस समय जिले में उनका जनाधार भी काफी बड़ा था। हालांकि भाजपा की लहर में उनके तमाम समर्थक भाजपा की तरफ चले गए। उधर भाजपा की मजबूत स्थिति के बाद उनके समर्थकों में भी निराशा का भाव बढ़ गया था।
अब भाजपा ने उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया है। इससे उनके कार्यकर्ताओं में भी एक उम्मीद जगी है। हालांकि यदि उनके पिछले कार्यकाल की तुलना की जाए तो उसे देखते हुए यह बहुत कम है लेकिन यह बात भी सही है कि जब उनके पास कुछ नहीं है तो भाजपा ने जो दिया वही बहुत है। कुछ भी हो जितिन के मंत्री बनने के बाद जिले मंे भाजपा के और मजबूत होने के कयास लगाए जा रहे है। खासकर जब भाजपा की तमाम विपक्षी पार्टियां ब्राम्हण वोटों में सेंधमारी करने के प्रयास में हैं।
ऐसे में भाजपा को एक ऐसे प्रभावशाली चेहरे की तलाश थी जो शाहजहांपुर के अलावा सीतापुर और खीरी में ब्राम्हण वोटों में अपनी पैठ रखता हो। खास कर धौरहरा क्षेत्र में जहां रेखा वर्मा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाजपा को एक अच्छे नेता की तलाश थी। जिले में विधान सभा की आठ सीटें हैं। जातीय आंकड़ों के हिसाब से ब्राम्हण भाजपा के सबसे मजबूत वोटर समझे जा रहे हैं। इसमें धौरहरा क्षेत्र में भी ब्राम्हण वोटर अह्म भूमिका रखते हैं। पिछले विधानसभा में धौरहरा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी बाला प्रसाद अवस्थी बहुत कम वोटों के अंतर से जीते थे। यह एक कारण भी देखा जा रहा है।
हालांकि भाजपा धौरहरा क्षेत्र से किसे प्रत्याशी बनाएगी यह तो समय के गर्भ में है लेकिन प्रत्याशी जो भी होगा ब्राम्हणों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में कराने की जितिन प्रसाद की अह्म जिम्मेदारी होगी। वहीं मंत्री बन जाने के बाद धौरहरा और सीतापुर के वे क्षेत्र जो जितिन प्रसाद के प्रभाव में आते है। वहां के लोगों की विकास की उम्मीदें भी बढ़ेंगी।
