बरेली: रुविवि परिसर में पेड़ों की छंटाई के नाम पर काटी हरियाली

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बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में छंटाई के नाम पर हरे और फलदार वृक्षों को काट दिया गया। करीब आधा दर्जन आम शीशम सेमल पाकड़ के पेड़ों को काटा गया है। मोटी मोटी डाल काटी गई हैं। विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रभारी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में …

बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में छंटाई के नाम पर हरे और फलदार वृक्षों को काट दिया गया। करीब आधा दर्जन आम शीशम सेमल पाकड़ के पेड़ों को काटा गया है। मोटी मोटी डाल काटी गई हैं। विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रभारी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में कुलसचिव राजीव कुमार को पत्र लिखकर बारादरी थाने में एफ आई आर दर्ज कराने की अनुमति मांगी है।

सुरक्षा प्रभारी सुधांशु ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में मंदिर के पास आम, पकड़, सेमल के कई फलदार और हरे भरे वृक्ष है। इन पेड़ों को विश्वविद्यालय के ही कर्मचारियों ने बिना प्रशासनिक और वन विभाग की अनुमति के काट दिया। पेड़ों को मोटी मोटी डालो को काट दिया गया जिसकी वजह से छांव गायब हो गई। पेड़ों की कटाई से वह काफी आहत हैं, इसलिए उन्होंने कुलसचिव को पत्र लिखकर कर्मचारियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने की अनुमति मांगी है।

कुलसचिव की अनुमति मिलने के बाद वह बारादरी में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। विश्वविद्यालय में काफी हरियाली है। इस हरियाली की वजह से ही विश्वविद्यालय का वातावरण काफी शुद्ध रहता है। यहां पर जंगल भी है। इस जंगल में प्रतिवर्ष आग भी लग जाती है। कुलपति ने कुछ महीने पहले ही यहां पर कोरोना में जान गंवाने वाले विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के नाम पर स्मृति उपवन तैयार कराया है। इसकी शुरुआत केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद संतोष गंगवार ने की थी। एक तरफ विश्वविद्यालय में उपवन तैयार किया जा रहा है तो दूसरी तरफ पेड़ों की कटाई से हरियाली गायब की जा रही है।

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