बरेली: 90 दिनों के ब्लॉक में भी रेलवे ने फंसाया पिलरों का निर्माण
बरेली, अमृत विचार। 90 दिनों का ब्लॉक लेने के बावजूद रेलवे के ठेकेदार ने लालफाटक ओवरब्रिज का निर्माण फंसा दिया है। ब्लॉक लेने के बाद जिस तेजी से पिलर बनाने का कार्य होना चाहिए। उस गति से नहीं हो रहा है। इसके साथ ब्लॉक लेने पर भी वाहनों का आवागमन जारी है। मंगलवार को जिलाधिकारी …
बरेली, अमृत विचार। 90 दिनों का ब्लॉक लेने के बावजूद रेलवे के ठेकेदार ने लालफाटक ओवरब्रिज का निर्माण फंसा दिया है। ब्लॉक लेने के बाद जिस तेजी से पिलर बनाने का कार्य होना चाहिए। उस गति से नहीं हो रहा है। इसके साथ ब्लॉक लेने पर भी वाहनों का आवागमन जारी है। मंगलवार को जिलाधिकारी नितीश कुमार ने ओवरब्रिज निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया तब रेलवे के ठेकेदार की लापरवाही सामने आयी।
ब्लॉक लेने पर भी रास्ता बंद नहीं होने और काम में ढिलाई बरते जाने पर जिलाधिकारी ने सख्त नाराजगी जताते हुए रेलवे के ठेकेदार की जमकर फटकार लगायी। पूछा, कितने पिलर तैयार कर चुके हैं और कितने और बनने हैं, काम तेजी से करने में कहां दिक्कत आ रही है? इस पर ठेकेदार ने चनेहटी रोड पर आवागमन बंद नहीं होने का हवाला देते हुए पिलर बनाने में देरी की बात कही। कहा कि सीमेंट और फर्टिलाइजर की रैक लेकर दिनभर में 200 ट्रक गुजरते हैं। इसलिए चनेहटी वाला रास्ता बंद नहीं हुआ है।
रास्ता बंद न होने की वजह से पिलर नहीं बना पा रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि 90 दिनों का ब्लॉक दिया है। इन दिनों में काम नहीं हुआ तो काली सूची में डलवा दूंगा। पिलर बनाने का काम रेलवे का है। रास्ता बंद होना जरूरी है तो क्यों बंद नहीं कर रहे। कहा कि रेलवे की आमदनी की चिंता ज्यादा है। ओवरब्रिज निर्माण का कार्य तेजी से कराने में रूचि नहीं दिख रही। डीएम ने कहा कि ब्लॉक का मतलब है कि पूर्णरूप से आवागमन बंद होना।
यदि आवागमन चालू है तो रेलवे और सेतु निगम के अधिकारियों की गलती है। डीएम ने वैकल्पिक व्यवस्था कर चनेहटी रोड को बंद कर पिलर बनाने का काम पूरा कराने के निर्देश दिए। मौके पर खड़े सेतु निगम के उप परियोजना निदेशक बीके सेन को भी लताड़ लगाते हुए कहा कि मै आपसे हर सप्ताह पूछता हूं, ओवरब्रिज निर्माण कार्य के दौरान कोई दिक्कत तो नहीं, तब कुछ नहीं बताते हैं। यहां आकर मुझे रास्ता बंद नहीं होने की सबसे बड़ी दिक्कत बतायी जा रही है।
इस पर डीपीएम का कोई जवाब नहीं बना। कहने लगे कि तीन-चार दिन से यातायात का आवागमन शुरू हुआ है। ब्लॉक के दौरान यातायात निकलने के संबंध में डीएम ने मौके पर एसपी ट्रैफिक से फोन पर बात की और चनेहटी रोड को बंद कराने के निर्देश दिए। डीएम के फोन पर कुछ देर के बाद एसपी ट्रैफिक मौके पर पहुंच गए थे। डीएम ने रेलवे के ठेकेदार को पिलर तैयार कराकर सिविल कार्य नवंबर तक पूरा कराने और दिसंबर तक गार्डर रखवाने के निर्देश दिए।
डेढ़ साल से बैठे रहे, अब लापरवाही बरत रहे
जिलाधिकारी ने रेलवे के ठेकेदार से कहा कि डेढ़ साल पहले रेलवे को अपने हिस्से का ओवरब्रिज तैयार कर गार्डर रखवाने के लिए क्रासिंग शिफ्टिंग के कार्य लिए रास्ता बनाकर दे दिया गया था लेकिन रेलवे के अधिकारी डेढ़ साल तक बैठ रहे। पिलर के डिजाइन को फाइनल कराने में रेलवे ने देरी की। सेतु निगम का कार्य पूर्ण होने की स्थिति में है। रेलवे को दोनों क्रॉसिंग के बीच में पिलर बनवाकर गाडर रखकर ओवरब्रिज के कैंट और बदायूं रोड वाले हिस्से जोड़ने हैं।
- 84 करोड़ की लागत से बन रहे ओवरब्रिज
- 2016 में हुआ था स्वीकृत
- 980 मीटर लंबा ओवरब्रिज का निर्माण हो रहा
24 पिलरों पर बनेगा 32 गार्डर का आरओबी
कैंट और बदायूं रोड के हिस्सों को जोड़ने के लिए लालफाटक ओवरब्रिज के बीच छोटी-बड़ी क्रासिंग के ऊपर आरओबी बनना है। रेलवे को अपने हिस्से में 24 पिलर बनाने हैं। दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिए 32 गार्डर रखे जाने हैं। ब्रांच लाइन पर आठ फाउंडेशन और दोनों साइड में 16 पिलर खड़े होंगे। बड़ी लाइन पर चार फाउंडेशन बनेंगे और आठ पिलर खड़े किए जाएंगे।
रेलवे के हिस्से में 46 मीटर के दो और 35 मीटर के दो स्पाइन हैं। इसमें 46 मीटर के 16 और 35 मीटर के 16 गाडर भी रखे जाएंगे। गार्डर बनवाने के लिए निविदा कई माह पहले ही हो चुकी है। आरओबी बनाने में रेलवे का करीब 30 करोड़ रुपये खर्च आ रहा है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर में तैयार हो रहे गार्डर
रेलवे के ठेकेदार ने जिलाधिकारी को बताया कि आरओबी के गार्डर छत्तीसगढ़ के रायपुर में तैयार कराए जा रहे हैं। गार्डर तैयार कराने का कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है जो कंपनी रेलवे के हिस्से में ओवरब्रिज का निर्माण करा रही है, वही कंपनी आरओबी पर गार्डर रखने का कार्य करेगी।
