बरेली: धरी रह गई घेराबंदी, टोल प्लाजा से निकल गया राकेश टिकैत का काफिला
बरेली, अमृत विचार। लखीमपुर खीरी में आंदोलनरत किसानों पर गाड़ी चढ़ाने की घटना का पता चलने पर देर रात तक जिले के किसान संगठन लामबंद होकर सोमवार को मोर्चा खोलने की तैयारी में जुटे रहे। वहीं प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच उनके मूवमेंट को लेकर जिले का पुलिस …
बरेली, अमृत विचार। लखीमपुर खीरी में आंदोलनरत किसानों पर गाड़ी चढ़ाने की घटना का पता चलने पर देर रात तक जिले के किसान संगठन लामबंद होकर सोमवार को मोर्चा खोलने की तैयारी में जुटे रहे। वहीं प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच उनके मूवमेंट को लेकर जिले का पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया।
भाकियू प्रमुख राकेश टिकैत के आने की सूचना पर रात करीब साढ़े आठ बजे फतेहगंज पश्चिमी टोल प्लाजा पर मीरगंज, शाही, शेरगढ़ समेत कई थानों का पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसानों का काफिला न गुजर पाए लेकिन रात करीब 10 बजे राकेश टिकैत टोल प्लाजा की वीआईपी लाइन से बगैर रुके करीब एक दर्जन गाड़ियों के काफिले के साथ निकल गए। इसका पता चलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
बताया जाता है कि टोल पर अचानक किसान नेताओं के वाहन हूटर बजाते हुए निकले तो पुलिस भी उनको रोकने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। बल्कि एक साइड में खड़े होकर मूकदर्शक बनी रही। इधर, घटना को लेकर विपक्षी सरकार की घेराबंदी में जुटे रहे। किसान नेताओं ने भाजपा को किसान विरोधी बताया। विपक्षी नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। वहीं कुछ ने खुद की पार्टी के एक-एक कार्यकर्ताओं को किसानों के साथ खड़ा होना बताया।
जो किसानों के आंदोलन को नहीं कुचल पाए, वे अब किसान भाइयों को कुचलने पर उतारू हैं। लखीमपुर खीरी में जो हुआ, वह दर्शाता है कि यूपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। सत्ताधारी दल को हिंसा से भी परहेज नहीं है। इस घटना की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। -शमीम खां सुल्तानी, सपा महानगर अध्यक्ष
लखीमपुर खीरी में जो हुआ उसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है। कृषि प्रधान देश का इतिहास है कि जब-जब किसानों की आवाज दबाने का काम सरकारों ने किया। वह सरकारें सत्ता में नहीं रही हैं। कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता किसानों के साथ खड़ा है। -अशफाक सकलैनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
लोकतंत्र में अपनी बात कहने और धरना प्रदर्शन का सभी को अधिकार है। लखीमपुर में केंद्रीय मंत्री के बेटे की गाड़ी से रौंदकर किसानों की हत्या भाजपा सरकार की तानाशाही एवं क्रूरता को दर्शाता है। इस घटना का सुप्रीम कोर्ट स्वयं ही संज्ञान ले, बीएसपी की यह मांग है। डा. जयपाल सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
भाजपा किसान विरोधी सरकार साबित हो चुकी है। किसानों की आवाज दबाने को उनको कुचला जा रहा है। सरकार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। राज्यपाल को संज्ञान लेना चाहिए। जब भाजपा के गृहमंत्री का बेटा किसानों को कुचल कर मार सकता है तो राष्ट्रपति शासन लगना भी जरूरी है। -अगम मौर्य, सपा जिलाध्यक्ष
जो किसान आंदोलन करते शहीद हो गए। पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता इस दुख की घड़ी में उनके परिवारों के साथ खड़ा है। प्रकरण की निष्पक्षता के लिए उच्च स्तरीय जांच होने चाहिए। इसके बाद जांच में मिले दोषियों पर सरकार को सख्त कार्रवाई करनी होगी। -अनुज गंगवार, प्रदेश सचिव, विधि मंच, अपना दल
लखीमपुर की घटना से साबित हो गया कि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र का हनन करना शुरू कर दिया है। इस प्रकरण से सरकार और सरकार के प्रतिनिधियों से दिक्कत बढ़ना तय है। किसानों को कुचलकर मार देने जैसी घटना पूरे देश में कही नहीं हुई। हमारी रणनीति तैयार है। -गजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू
लखीमपुर की घटना निंदनीय है। किसान डेढ़ साल से मांगों को लेकर आंदोलनरत है। लेकिन हठधर्मी सरकार मांगे माने को तैयार नहीं है। किसानों पर लगातार अत्यातार बढ़ रहा है। मृतक के आश्रितों को एक-एक करोड़ की सहायता राशि देने के साथ ही सीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए। -अच्छन अंसानी, जिलाध्यक्ष, आजाद समाज पार्टी
