बरेली: सीईओ ने मांगे दुकानों के दस्तावेज, व्यापारी बोले-न्यायसंगत नहीं

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बरेली, अमृत विचार। बरेली छावनी परिषद के अधीन संपत्तियों में शामिल बीआई बाजार की दुकानों के कई दुकानदारों से दस्तावेज मांगे जाने का विरोध शुरू हो गया है। मुख्य अधिशासी अधिकारी की ओर से जारी पत्र के विरोध में गुरुवार को कैंट व्यापार मंडल के पदाधिकारी विधायक राजेश अग्रवाल से मिले और 89 संपत्तियों की …

बरेली, अमृत विचार। बरेली छावनी परिषद के अधीन संपत्तियों में शामिल बीआई बाजार की दुकानों के कई दुकानदारों से दस्तावेज मांगे जाने का विरोध शुरू हो गया है। मुख्य अधिशासी अधिकारी की ओर से जारी पत्र के विरोध में गुरुवार को कैंट व्यापार मंडल के पदाधिकारी विधायक राजेश अग्रवाल से मिले और 89 संपत्तियों की दिक्कतों का निस्तारण की मांग की है।

मांगपत्र सौंपते हुए पदाधिकारियों ने बताया कि छावनी परिषद की 89 दुकानें किराये पर आवंटित हैं। कुछ 25 से 30 तो कुछ दुकानें 50-60 साल से बतौर किरायेदार व्यापारी कारोबार कर रहे हैं। बीआई बाजार के अधिकतर किरायेदार रिफ्यूजी हैं तो बंटवारे के समय से किरायेदार हैं। पूर्व में कभी इन दुकानों की नीलामी नहीं हुई लेकिन समय-समय पर किराये में बढ़ोत्तरी होती रही है।

बताया कि वर्तमान में ज्यादातर दुकानदारों ने 31 मार्च 2022 तक का किराया जमा कर दिया है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले दो से तीन साल से छावनी परिषद द्वारा दुकानों को खाली करने एवं पुन: नीलाम करने की चेतावनी दी जा रही है। कैंट एक्ट के तहत हर तीन से पांच साल के बाद मूल आवंटियों का रिन्यूवल लखनऊ कमांड से जरूरी होना बताया है लेकिन कभी भी दुकानदारों से रिन्यूवल के लिए आवेदन नहीं मांगे गए।

यह भी बताया कि छावनी परिषद की कुछ दुकानों के मूल आवंटियों ने स्वेच्छा से अपनी किरायेदारी किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित की दी। परिषद बोर्ड में इस तरह के हस्तांतरण का प्रावधान निहित है। इसमें बोर्ड द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करवाकर यह प्रक्रिया अपनायी जाती रही है। समय-समय पर भी हस्तांतरण शुल्क में वृद्धि की जाती है।

ऐसे में किरायेदारों को नोटिस देकर यह पूछा जाना कि वह किस हैसियत से अपनी दुकान पर व्यवसाय कर रहे हैं यह न्यायसंगत नहीं है। पदाधिकारियों ने राजेश अग्रवाल से दुकानों के रिन्यूवल प्रपोजल छावनी परिषद की ओर से लखनऊ कमांड को भिजवाने की मांग की है। मिलने वालों में केएल गेरा, शशिकांत, श्रीधर शुक्ला आदि पदाधिकारी शामिल थे।

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