बरेली: आठ फिट गड्ढे में दबे दो मजदूर, हालत नाजुक
कैंट, अमृत विचार। कैंट इलाके में नाली की गहरी खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से दो मजदूर दब गए। हादसा होने पर मौके पर खलबली मच गई। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला गया। हादसे में दोनो को गंभीर चोटे आई हैं। घायल मजदूरों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। …
कैंट, अमृत विचार। कैंट इलाके में नाली की गहरी खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से दो मजदूर दब गए। हादसा होने पर मौके पर खलबली मच गई। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला गया। हादसे में दोनो को गंभीर चोटे आई हैं। घायल मजदूरों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
कैंट के बंगला नंबर 12 वृन्दावन गेस्ट हाऊस के पास सड़क के किनारे जेसीबी से करीब आठ से 10 फिट की नाली की खुदाई का कार्य किया जा रहा है। गुरुवार को खुदाई के दौरान गांव परगंवा निवासी पिन्टू पुत्र मोहन लाल व मुकेश पुत्र इतवारी लाल गहराई में सीवर लाइन के लिए पाइप डाल रहे थे।
शाम करीब साढ़े चार बजे अचानक मिट्टी ढह जाने से दोनों उसमें दब गये। पिंटू और मुकेश के दबने पर मौके पर मौजूद लोगों ने आनन फानन में दोनों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मजदूरों की ओर से किसी के खिलाफ कोई तहरीर नहीं दी गई है। पुलिस का कहना है कि यदि तहरीर मिलती है तो रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
पहले जा चुकी है मजदूरों की जान
निर्माण कार्य के दौरान लगातार निर्माण एजेंसियां लापरवाही बरत रहीं है। हादसा होने पर अधिकारी भी कार्रवाई की बात करते हैं लेकिन उसके बाद अनदेखी की जाती है। 2 सितंबर को फतेहगंज पश्चिमी में बेसमेंट की खुदाई के दौरान पास का भवन गिर गया था। इस हादसे में दो मजदूरों की दबने से मौत हो गई थी। एक मजदूर की जान बचा ली गई थी। 18 जनवरी को चौकी चौराहा पर सीवर लाइन की जेसीबी से खुदाई के दौरान हादसा हो गया था। इसमें मजदूर दब गया था। गनीमत रही थी कि वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उसे तुरंत बाहर निकालकर उसकी जान बचा ली थी।
जुलाई 2018 में पीलीभीत बाईपास पर केबिल बिछाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था। इसमें आठ मजदूर दब गए थे। चार मजदूरों की मौके पर मौत हो गई थी और दो ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इसके अलावा कई बार हादसे हो चुके हैं। निर्माण कार्य के दौरान काम करने वाले मजदूर सेफ्टी किट का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। यहां तक कि उन्हें हेलमेट भी उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं। इसके अलावा सड़क पर निर्माण के दौरान खतरे की पट्टी भी नहीं लगायी जाती है और न ही रास्ते को रोका जाता है।
