अल्ट्रावायलेट किरणें सीवर के पानी से बैक्टीरिया करेंगी खत्म, जानें कैसे…
लखनऊ। नदियों में सीवर के गंदे पानी को सीधे जाने से रोकने के लिए अब नई तकनीक का प्रयोग हो रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में अल्ट्रावायलेट किरणें सीवर के पानी से बैक्टीरिया खत्म करेंगी। जिससे नदियों में सीधे सीवर का पानी नहीं गिरेगा और प्रदूषण के स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी। …
लखनऊ। नदियों में सीवर के गंदे पानी को सीधे जाने से रोकने के लिए अब नई तकनीक का प्रयोग हो रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में अल्ट्रावायलेट किरणें सीवर के पानी से बैक्टीरिया खत्म करेंगी। जिससे नदियों में सीधे सीवर का पानी नहीं गिरेगा और प्रदूषण के स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी। सीवर का रोज 12 करोड़ लीटर गंदा पानी जो पहले गंगा में गिर रहा था अब सिंचाई के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
उप्र जल निगम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। सीवेज के गंदे पानी में पाया जाने वाला बैक्टीरिया अल्ट्रावायलेट किरणों के सम्पर्क में आते ही खत्म हो जाता है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय न्यू अर्बन इंडिया एक्सपो में उप्र जल निगम ने इस तकनीक का प्रदर्शन किया।
वाराणसी के गोइठहा स्थित 120 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन कर चुके हैं। सीएंडडीएस के महाप्रबंधक नौशाद अहमद ने बताया कि यह यूपी का पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है जहां सीवर के गंदे पानी का डिस्इंफेक्शन अल्ट्रा वायलेट किरणों से किया जाता है। सेक्वेंसियल बेन्च रिएक्टर टेक्नोलॉजी का इसमें प्रयोग किया गया है। जिससे कम समय में ज्यादा अच्छे तरीके से सीवेज साफ हो जाता है।
प्रतिदिन लगभग 12 करोड़ लीटर सीवर का गंदा पानी जो पहले गंगा में गिरता था। उसे अब साफ करके सिंचाई में इस्तेमाल किया जा रहा है। लखनऊ के हैदर कैनाल में निर्माणाधीन 120 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भी इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। प्लांट तैयार हो जाने के बाद रोज 12 करोड़ लीटर सीवर का गंदा पानी गोमती में सीधे गिरने से रुक जाएगा। जिससे गोमती को स्वच्छ और निर्मल रखने में मदद मिलेगी।
आगरा में पहुंचा दिया गंगा का पानी
आगरा में यमुना नदी बहती है लेकिन तकनीक से गंगा का पानी भी पहुंच रहा है। जल निगम ने एक्सपो में आगरा का गंगाजल प्रोजेक्ट भी प्रदर्शन के लिए रखा। इस प्रोजेक्ट के तहत बुलंदशहर के पालराझार से आगरा लगभग 150 किमी. की दूरी है। गंगा का पानी 2100 एमएम के दो पाइपों द्वारा आगरा पहुंच रहा है। इसकी खास बात यह है कि इसमें कहीं भी पंपिंग करने की जरुरत नहीं पड़ती है। 2800 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का प्रधानमंत्री 2019 में उद्घाटन कर चुके हैं।
