शक्तिपीठ श्रवण देवी माता के पूजन का विशेष स्थान, जानिए क्यों…
हरदोई। जिले की शक्तिपीठ श्रवण देवी माता के पूजन का अपना अलग स्थान है। बिना माता श्रवण देवी की पूजा किए कोई भी शादी बारात नगर में नहीं होती है। किसी शादी विवाह से पूर्व महिलाएं श्रवण देवी की पूजा करना नहीं भूलती हैं। इस शक्तिपीठ का उल्लेख देवी पुराण में भी है माता पार्वती …
हरदोई। जिले की शक्तिपीठ श्रवण देवी माता के पूजन का अपना अलग स्थान है। बिना माता श्रवण देवी की पूजा किए कोई भी शादी बारात नगर में नहीं होती है। किसी शादी विवाह से पूर्व महिलाएं श्रवण देवी की पूजा करना नहीं भूलती हैं। इस शक्तिपीठ का उल्लेख देवी पुराण में भी है माता पार्वती का श्रवण अंग यहां गिरने से श्रवण देवी की स्थापना हुई थी।
पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में अपने दामाद भगवान शिव को उन्होंने नहीं बुलाया था। यही नहीं उन्होंने अपनी पुत्री पार्वती को भी यज्ञ के लिए आमंत्रित नहीं किया था। बिना बुलावा के माता पार्वती जब यक्ष के यज्ञ में गई तो यक्ष ने न तो उनका सम्मान किया और ना ही उनके पति का इसी बात से माता पार्वती क्षुब्ध हो गई। पति द्वारा रोके जाने पर भी बिना बुलावा पिता के यहां पहुंचने से अपना व अपने पति का अनादर देखकर वह बहुत दुखी हुई। पति द्वारा रोके जाने के बावजूद पिता के घर जाने की जिद का प्रायश्चित करते हुए वह अग्निकुंड में समा गई।
पार्वती के हवन कुंड में स्वयं को समाप्त कर लेने से भगवान शिव अति क्रोधित हुए और वह तांडव करने लगे। हवन कुंड में जलकर सती हुई मां पार्वती का मृत शरीर लेकर तांडव करते हुए शिव शंकर भगवान जिस मार्ग से गुजरे। उस मार्ग में माता पार्वती के मृत शरीर के अंग गिरते गए। जिस स्थान पर जो अंग गिरा वह स्थान शक्तिपीठ बन गया और उसी अंग से संबंधित उस स्थान का नाम पड़ गया। हरदोई जिले में माता पार्वती का श्रवण अंग (कान) गिरा था। इस वजह से शक्तिपीठ श्रवण देवी माता की स्थापना हुई जिले की ही नहीं बल्कि आसपास जिलों के भी लोग इस शक्तिपीठ पर पूजन करने आते हैं। जिले के कोई भी वैवाहिक समारोह की शुरुआत अधिकांश लोग माता श्रवण देवी मंदिर पर पूजन करने के बाद ही करते हैं। माता का यह श्रवण देवी नाम देवी भागवत में 529 क्रमांक पर आता है।
प्रति वर्ष क्वांर माह में यहां पर विशाल महायज्ञ का आयोजन होता है जिसमें देश के प्रकांड विद्वान व कथा मर्मज्ञ भक्ति रस की गंगा बहाते हैं। शक्तिपीठ शर्मा देवी की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के ही नहीं बल्कि आसपास जिलों के लोग भी यहां पर पूजन करने के लिए आते हैं नवरात्र में यहां पर विशेष कर महिलाएं पूजन अर्चन के लिए आती हैं। यहां पर बड़ी संख्या में नवरात्र के अंतिम दिन लोग कन्या भोज का आयोजन भी करते हैं।
