रायबरेली: अधूरा रह गया पक्की छत का सपना, झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं ग्रामीण
रायबरेली। शासन की योजनाएं धरातल पर किस तरह कार्य कर रही हैं। इसकी बानगी सलोन विकास क्षेत्र के ग्राम सभा कटेह में देखने को मिल रही है। यहां आज भी तमाम गरीब परिवार कच्ची झोपड़ी और छप्पर के सहारे रहने के लिए विवश हैं। इनको अभी तक पक्की छत नसीब नहीं हो सकी है। सलोन …
रायबरेली। शासन की योजनाएं धरातल पर किस तरह कार्य कर रही हैं। इसकी बानगी सलोन विकास क्षेत्र के ग्राम सभा कटेह में देखने को मिल रही है। यहां आज भी तमाम गरीब परिवार कच्ची झोपड़ी और छप्पर के सहारे रहने के लिए विवश हैं। इनको अभी तक पक्की छत नसीब नहीं हो सकी है। सलोन विकास खण्ड की ग्राम सभा कटेह के गरीब मुसहरा जाति के लोगों को मुख्यमंत्री आवास योजना से दूर रखा गया है।
गांव के ग्रामीण आज भी टूटी फूटी कच्ची झोपड़ी में अपने परिवार के साथ गुजर बसर करने को मजबूर है।बता दें कि राजापुर कटेह गांव की सुंदारा पत्नी रमेश अपने पांच बच्चों वंदना, रंजना, मोहनी, रेशमा व बेटा परमजीत को लेकर टूटी फूटी कच्ची झोपड़ी में अपना गुजर बसर कर रही है। सुंदारा ने बताया कि पति रमेश व बच्चे पेड़ों से पत्तियां तोड़ कर लाते हैं।जिसके बाद वैवाहिक कार्यक्रमों में पत्तल दोना बेचकर परिवार का भरण पोषण किया जाता है।उन्होंंने ने बताया कि लगभग 16 वर्ष पूर्व ग्राम प्रधान के द्वारा पट्टे में आवास के लिये जमीन दी गयी थी।परन्तु दो वक्त की रोटी के चक्कर मे आज तक ठीक से कच्ची कोठरी का निर्माण नहीं कर सके। सुंदारा ने कहा कि जब यह मालूम हुआ था कि सरकार द्वारा गरीबों को आवास दिया जा रहा है तो लगा कि अब हमारा घर भी कच्चा नहीं रहेगा और हमारे बच्चों को पक्की छत नसीब हो जायेगी, लेकिन आज तक किसी ने भी हमारी ओर मुड़कर देखना मुनासिब नही समझा।
खण्ड विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह के मुताबिक क्षेत्र के सभी ग्राम सभाओं में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास के पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया जा रहा है।जिसके बाद सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जायेगा।
