पीलीभीत: शहीद सारज सिंह के अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, हर किसी की आंखें नम
बिलसंडा, अमृत विचार। जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में शहीद हुए शाहजहांपुर के थाना बंडा के गांव अख्तियारपुर के लाल सारज सिंह की गमगीन माहौल में हजारों नम आंखों के बीच गुरुवार सुबह 11 बजे उनके ही घर के पास राजकीय सम्मान से सेना की गारद और मातमी धुनों के बीच अंत्येष्टि कर दी गई। …
बिलसंडा, अमृत विचार। जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में शहीद हुए शाहजहांपुर के थाना बंडा के गांव अख्तियारपुर के लाल सारज सिंह की गमगीन माहौल में हजारों नम आंखों के बीच गुरुवार सुबह 11 बजे उनके ही घर के पास राजकीय सम्मान से सेना की गारद और मातमी धुनों के बीच अंत्येष्टि कर दी गई। अंतिम विदाई में शहीद की पत्नी रजविंदर कौर पछाड़ खाकर गिर पड़ी। यह देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई। सबके चेहरे पर गम और गुस्से को साफ देखा गया। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों के बीच वीर सपूत को अंतिम विदाई दी गई।
सारज सिंह का शव बृहस्पतिवार सुबह 9 बजे बंडा पहुंचा। यहां पहले से ही हजारों की संख्या में भीड़ जमा हो गई। परिवार और आस-पड़ोस के लोग अपने वीर सपूत के आने के इंतजार में थे। सेना की गाड़ी से तिरंगे में लिपटा सारज का शव जैसे ही सबने देखा तो भीड़ आतंकवाद मुर्दाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने लगी। सेना के बैंड सबसे आगे थे। उसके भी आगे तिरंगे में सजी लाउडस्पीकर बांधे खुली गाड़ी। उस पर गीत बज रहा था, मेरी जान तिरंगा है…मेरी शान तिरंगा है…अभिमान तिरंगा है। इस मिट्टी की शीश नही झुकने देंगे…। इसकी शान न जाने पाए, चाहें जान भले ही जाए …जैसे देशभक्ति गीतों को सुनकर हर किसी के शरीर मे कम्पन दौड़ने लगा।
परिवार और आस-पड़ोसियों में एक तरफ वीर सपूत के जाने का गम था तो वहीं देश की सेवा करते अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले गांव के लाल पर गर्व भी था। आखरी दर्शन करने वालों की तादात इतनी थी कि गांव के बाहर सड़कों पर भी तिल रखने की जगह नही बची। जैसे ही शव मकसूदापुर होकर गांव अख्तियारपुर के समीप पहुंचा तो स्थिति बेकाबू हो गयी।
हजारों की भीड़ पाकिस्तान मुर्दाबाद,,जब तक सूरज चाँद रहेगा,, सारज तेरा नाम रहेगा,,जैसे दिल को झकझोरने वाले नारों के बीच पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। जहां उनके अंतिम दर्शन करने वालों का सैलाब उमड़ पड़ा।
वीर नारी का विलाप सुनकर नहीं रुके आंसू
यूँ तो दूर दराज से हजारों की संख्या में आए लोग सारज की मौत पर दुखी थे। मगर, शहीद की पत्नी रजविंदर कौर का दुख किसी से देखा नहीं जा रहा था। वह कई बार रोती बिलखती और फिर पछाड़ खाकर गिर जाती और बेहोश हो जाती। उसके मुंह से यही निकल रहा था कि क्या इसी दिन के लिए शादी थी। ऊपर वाले ने मेरे साथ यह कैसा धोखा किया। मुझे भी अब नहीं जीना। आपके साथ ही भगवान के घर जाना है। शहीद की पत्नी का ऐसा विलाप सुनकर हर कोई फफक पड़ा। आंसू रोके नहीं रुके।
आप तो भइया की शादी में आने वाले थे
सारज सिंह की शादी शाहबाद हरदोई में पिछले दिसंबर में रजविंदर कौर के साथ बड़े धूमधाम से हुई थी। शादी के बाद सारज महज 16 दिन ही घर पर रहे। उसके बाद वह सेना की ओर से जम्मू बुला लिए गए। इसके बाद वह दोबारा जून में घर आए थे।अब साले की शादी में वह दिसंबर में आने वाले थे। इससे पहले ही उन्होंने देश सेवा में अपनी जान दे दी। यही बात कहकर शहीद की पत्नी याद कर रही थी कि आप तो भइया की शादी में घर आने वाले थे। फिर रास्ता क्यों भूल गए।
