लखीमपुर खीरी मामले में आरोपी अंकित दास पर लखनऊ में भी दर्ज है केस
लखनऊ। लखीमपुर हिंसा के आरोपी पूर्व मंत्री अखिलेश दास के भतीजे अंकित दास की अपराधिक इतिहास गुरुवार को वायरल हो गया। अंकित और उसके बॉडी गार्ड लतीफ काले के खिलाफ मार्च में अपहरण और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी एफआईआर कॉपी सोशल मीडिया वायरल हो रही है। मूलरुप से देवरिया निवासी राकेश कुमार …
लखनऊ। लखीमपुर हिंसा के आरोपी पूर्व मंत्री अखिलेश दास के भतीजे अंकित दास की अपराधिक इतिहास गुरुवार को वायरल हो गया। अंकित और उसके बॉडी गार्ड लतीफ काले के खिलाफ मार्च में अपहरण और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी एफआईआर कॉपी सोशल मीडिया वायरल हो रही है। मूलरुप से देवरिया निवासी राकेश कुमार मिश्रा की तहरीर पर 25 मार्च को गौतमपल्ली थाने में अंकित के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
राकेश के अनुसार बिल्डर अंकित दास के साथ तीन साल तक पार्टनरशिप थी। इसी दौरान उन्होंने दूसरे व्यापारी विजेंद्र वर्मा व उनकी पत्नी वसंती वर्मा के साथ मिलकर कारोबार शुरु किया। यह बात अंकित दास व उनकी पत्नी रूपाली दास को नागवार लगी। अंकित ने 18 जून 2020 को उन्हें 1090 चौराहे के पास बुलाया। जहां अंकित दास, लतीफ काले, मृदुल भदौरिया, मो. कासिम, अब्दुल्ला सिद्दीकी, इस्तियाक अली, राहुल शर्मा, विनोद थापा व कई अन्य लोग मौजूद थे। इन लोगों ने राकेश व उसके साथियों को बंधक बना लिया। राकेश को लखीमपुर के एक होटल ले गए। जहां तीन दिनों तक बंधक बनाए रखा।
इस दौरान रिवाल्वर दिखाकर दो चेक बुक पर दस्तखत कराए। साथ ही स्टाम्प पेपर व सादे कागज पर भी दस्तखत करवा लिया। इसके बाद उनकी लग्जरी कार भी कब्जा कर ली। जिसे उन्होंने देवरिया एसबीआई से लोन कराकर लिया था। 2000 वर्ग फीट की जमीन को दानपात्र में अपनी पत्नी रूपाली के नाम पर स्थानारित करवा लिया था।
अंकित दास ने भी इससे पहले राकेश के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में ही मुकदमा दर्ज करवाया था। आरोप था कि दोनों ने मिलकर अंकित दास का तीन करोड़ रुपये हड़प लिया था। बिल्डर अंकित दास का कहना था कि राकेश उनके पार्टनर थे। उन्होंने करोड़ों रुपये हड़प लिया। जब जानकारी हुई तो उनसे पूछताछ की गई तो वह टालमटोल करने लगे। उनके खिलाफ कई जालसाजी के मुकदमें दर्ज हैं।
