बीबीएयू: बंद कोचिंग पर खर्च हुए लाखों रुपए, यूजीसी के हिसाब मांगने पर खुली पोल

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। बीबीएयू में आरसीए कोचिंग के निदेशक के इस्तीफे में एक बड़ा मामला सामने आया हैं। निदेशक के इस्तीफे के अनुसार एक अप्रैल 2020 से आरसीए कोचिंग का एक्सटेंशन खत्म हो गया था। इसके बावजूद कोचिंग अधिकारी रखा बजट हड़प गए और अब हिसाब नहीं दे पा रहे। बीबीएयू में एससी व एसटी के लिए …

लखनऊ। बीबीएयू में आरसीए कोचिंग के निदेशक के इस्तीफे में एक बड़ा मामला सामने आया हैं। निदेशक के इस्तीफे के अनुसार एक अप्रैल 2020 से आरसीए कोचिंग का एक्सटेंशन खत्म हो गया था। इसके बावजूद कोचिंग अधिकारी रखा बजट हड़प गए और अब हिसाब नहीं दे पा रहे।

बीबीएयू में एससी व एसटी के लिए नि:शुल्क कोचिंग चलती थी। जनवरी 2021 में यूजीसी ने एक पत्र में बीबीएयू के पास बचे कोचिंग के 32.61 लाख हिसाब मांगा था, जिसके बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया था। फिर कोरोना के कारण लॉकडाउन लगने पर मामला शांत हो गया था, लेकिन पिछले महीने आरसीए निदेशक ने अपना इस्तीफा कुलपति को जब सौंपा, तो मामला फिर हवा मिल गई।

इस्तीफे के अनुसार निदेशक आरसीए प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कई बार वित्तीय विभाग से रुपयों के हिसाब के बारे में लिखकर पूछा लेकिन वित्तीय विभाग ने कोई जवाब नहीं भेजा। फिर निदेशक को आखिरी में खुद बीबीएयू में आरटीआई के माध्यम से पूछना पड़ा कि आरसीए में खर्च हुए पैसे का हिसाब दें।

वित्तीय विभाग ने जवाब में बताया कि उनके पास खर्च हुए पैसे का कोई हिसाब नहीं हैं। बीबीएयू प्रवक्ता डॉ. रचना गंगवार ने बताया कि आरसीए कोचिंग के निदेशक ने इस्तीफा दिया लेकिन कुलपति ने स्वीकार नहीं किया। फिलहाल वित्तीय बजट के विषय में कोई जानकारी नहीं है।

जनवरी में मांगा था यूजीसी ने हिसाब
32.61 लाख खर्च होने का हिसाब यूजीसी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जनवरी 2021 में मांगा था, लेकिन अक्टूबर तक यूजीसी को कोई जवाब नहीं भेजा है। सूत्रों के अनुसार पैसे खर्च पर एक जांच कमिटी बनाई थी, लेकिन फिर कुछ दिनों बाद जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

एक बड़ा प्रश्न है जो बीबीएयू अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। सवाल यह है कि बीबीएयू में आरसीए कोचिंग जब लंबे समय से बंद चल रही थी तो फिर आखिरकार पैसा खर्च कहां हुआ? सूत्रों के अनुसार कोचिंग बंद होने के बाद भी अभी तक विश्वविद्यालय आरसीए कोचिंग में लोगों को वेतन दिया जा रहा हैं और वहीं समान के खरीद में 32.61 लाख खर्च होने का भी कोई हिसाब नहीं है।

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