बरेली: …तो बटाई पर खेती करने वाले किसान रह जाएंगे खाली हाथ
बरेली, अमृत विचार। बारिश से फसलों की बर्बादी का सर्वे चल रहा है। लेकिन, अपनी पूंजी लगाकर फसल तैयार करने वाले बटाईदार किसान परेशान हैं, क्योंकि जब फसल पकने पर काटने का समय आया तो एक झटके में सब कुछ बर्बाद हो गया। इस स्थिति में खेत मालिक को तो बीमा कंपनी व प्रशासन से …
बरेली, अमृत विचार। बारिश से फसलों की बर्बादी का सर्वे चल रहा है। लेकिन, अपनी पूंजी लगाकर फसल तैयार करने वाले बटाईदार किसान परेशान हैं, क्योंकि जब फसल पकने पर काटने का समय आया तो एक झटके में सब कुछ बर्बाद हो गया। इस स्थिति में खेत मालिक को तो बीमा कंपनी व प्रशासन से मदद मिल जाएगी, लेकिन बटाईदार खाली हाथ रह जाएंगे। इनका क्या होगा, यह एक सवाल है। शनिवार और रविवार को हुई भारी बारिश से सर्वाधिक नुकसान धान की फसल का हुआ है। किसानों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उसको समझ में नहीं आ रहा इस स्थिति में वह करें तो क्या करें।
दूसरी तरफ, खेत मालिक किसानों की बात करें तो उसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रशासन की ओर से आपदा राहत कोष से सहायता धनराशि मिल जाएगी। नुकसान आंकलन का सर्वे कृषि व राजस्व टीम ने शुरू भी कर दिया है, लेकिन जिले में करीब 25 प्रतिशत ऐसे किसान हैं। जो बटाई पर खेत लेकर फसल तैयार करते हैं। उन्होंने फसल बुवाई, खाद, बीज और सिंचाई में अपने पास से रुपये खर्च किए। जब फसल काटने का समय आया तो बारिश ने अरमानों पर पानी फेर दिया। इस नुकसान की भरपाई को लेकर बटाईदार किसानों की चिंता बढ़ी है।
क्योलडिया ब्लाक के सूर्यप्रकाश के मुताबिक तीन बीघा खेत बटाई में लेकर धान की फसल लगाई थी। जो बारिश में पूरी तरह से नष्ट हो गई। जबकि बीज, खाद और जुताई में करीब 30 हजार रुपये खर्च हुआ है। इसी तरह केसरपुर के किसान सीताराम का कहना है धान की फसल पूरी तरह नष्ट होने के बाद समझ नहीं आ रहा है उधारी कैसे देंगे। आगे गेहूं की बुवाई करने के लिए खाद, बीज का भी संकट दिखाई दे रहा है। उप कृषि निदेशक धीरेंद्र चौधरी का कहना है कि खतौनी में जिसका नाम दर्ज होता है, उसी को बारिश से बर्बाद फसलों का मुआवजा दिया जाएगा। बटाई पर खेत लेकर फसल तैयार करने वालों के नुकसान की भरपाई करने का कोई नियम नहीं है।
नुकसान की भरपाई को किसानों की भूमि का जुटा रहे रिकार्ड
शासन के निर्देश पर कृषि विभाग और राजस्व विभाग ने बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई को संयुक्त रूप से सर्वे शुरू कर दिया है। टीमें किसानों की भूमि का रिकार्ड जुटा रही हैं। गांव-गांव खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक दस्तावेज जमा कराए जा रहे हैं। उप कृषि निदेशक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश से धान की फसल जो नुकसान हुआ है। उसका सर्वे कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव कर रही हैं। जल्द ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
