मुरादाबाद : बेसहारा कुत्तों का सहारा बना चंद्रप्रभा का ‘आशियाना’

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद/भावना, अमृत विचार। सड़क के आवारा कुत्तों को लोग दुत्कार कर भगा देते हैं। यहां तक कि उनकी ओर देखना भी पसंद नहीं करते। इस सबसे इतर रेलवे कॉलोनी की रहने वाली चंद्रप्रभा सड़क पर घूमते बेसहारा कुत्तों की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ती। अब घर से बाहर निकलते समय कहीं भी कोई घायल …

मुरादाबाद/भावना, अमृत विचार। सड़क के आवारा कुत्तों को लोग दुत्कार कर भगा देते हैं। यहां तक कि उनकी ओर देखना भी पसंद नहीं करते। इस सबसे इतर रेलवे कॉलोनी की रहने वाली चंद्रप्रभा सड़क पर घूमते बेसहारा कुत्तों की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ती।

अब घर से बाहर निकलते समय कहीं भी कोई घायल या असहाय हालत में कुत्ता मिलता है तो वे उसे घर ले आती हैं। उसका उपचार करने के बाद उसे घर में रख लेती हैं। वर्ष 2005 से शुरू हुआ उनका यह क्रम अनवरत जारी है। वर्तमान में उनके पास ऐसे 41 कुत्ते हैं। चंद्रप्रभा बताती हैं कि उनका यह सफर 16 साल पहले तब शुरू हुआ था, जब उन्हें एक दिन सड़क पर घायल फीमेल डॉग मिली। वह उसे अपने घर ले आईं और उसका उपचार करवाया। बीमारी के चलते सात साल की उम्र में उसकी मौत हो गई। उसके बाद से लावारिस कुत्तों के प्रति उनका प्रेम ऐसा बढ़ा कि उनकी सेवा ही उनका धर्म बन गई।

कोरोना काल में बेसहारा हुए कुत्तों को दिया सहारा
कोरोना काल में यह चर्चा भी जोरो पर थी कि कोरोना संक्रमण कुत्तों, बिल्लियों से भी फैल रहा है। इस पर कई लोगों ने घबरा कर अपने कुत्तों के सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिया था। चंद्रप्रभा ने उन्हें अपने घर में शरण दी। उनका कहना है कि कुत्ते आपस में लड़ें नहीं तथा उन्हे रहने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए उन्होंने कुत्तों के रहने लिए अलग-अलग पिंजरे की व्यवस्था की हुई है। वहां पर ही उनके खाने की व्यवस्था कर दी जाती है।

परिवार का मिलता है सहयोग
चंद्रप्रभा बताती हैं कि उनके घर में इस समय 41 कुत्ते हैं, जिन्हें वह बेहद प्यार करती हैं। उनकी देखभाल करने में समय कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। दैनिक जीवन की भागम भाग में भी वह उनके लिए समय निकाल ही लेती हैं। चंद्रप्रभा बताती हैं कि उनके इस कार्य में पति और दोनों दो पुत्र भी साथ निभाते हैं। उनके घर में मौजूद कुत्ते खरीदे हुए नहीं, बल्कि ऐसे हैं, जिन्हें लोगों ने सड़क पर बेसहारा छोड़ दिया। घायल कुत्तों के घावों को स्वयं साफ कर दवा आदि लगाने का कार्य भी अपने हाथ से करती हैं। उनके ठीक होने के बाद उन्हें सड़क पर न छोड़ अपने पास ही रख लेती हैं। वह कहती हैं कि पति के सहयोग की वजह से वह बेसहारा कुत्तों की देखभाल कर पा रही हैं।

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