बरेली: पासवर्ड चोरी कर विभीषण कर रहे फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का खेल
बरेली, अमृत विचार। फर्जी वेबसाइट और पासवर्ड चोरी करके जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं लेकिन सरकारी सिस्टम जालसाजों के इस खेल की तह तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इसमें भुक्तभोगी को यह पता ही नहीं होता कि उसके नाम का ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र …
बरेली, अमृत विचार। फर्जी वेबसाइट और पासवर्ड चोरी करके जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं लेकिन सरकारी सिस्टम जालसाजों के इस खेल की तह तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इसमें भुक्तभोगी को यह पता ही नहीं होता कि उसके नाम का ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हो गया है। ऐसे में महत्वपूर्ण अभिलेख का अनुचित इस्तेमाल होने की भी आशंका बनी रहती है। इस खेल में कहीं न कहीं नगर निगम के किसी कर्मचारी के शामिल होने का शक जताया जा रहा है। आखिर क्यूआर कोड फर्जी प्रमाणपत्रों पर कैसे छापा गया। नगर निगम के साथ पुलिस भी इसकी जांच कर रही है।
अभी कुछ दिन पहले जालसाजों ने केंद्र सरकार की योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर कई फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बना डाले। लोगों को शक न हो, इसके लिए इन पर फर्जी क्यूआर कोड भी छापा गया। पुष्टि के लिए उसे वेबसाइट से भी लिंक किया। ऐसे ही दो जन्म प्रमाणपत्र जांच के लिए नगर निगम पहुंचे तो मामला पकड़ में आया। इस पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार की ओर से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कोतवाली में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि नवाबगंज के गांव जगराजपुर में रहने वाले राकेश मिश्रा के पुत्र अमन मिश्रा और फरीदपुर के गांव फैजनगर के संतोष गंगवार के बेटे अक्षु गंगवार के जन्म प्रमाणपत्र जांच के लिए नगर निगम को भेजे गए थे। जांच में वे प्रमाणपत्र फर्जी निकले, क्योंकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के बजाय योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी किए गए थे। नगर निगम के दो कर्मचारियों ने उन पर बने क्यूआर कोड को स्कैन किया तो वे लोग फौरन ही उस वेबसाइट से कनेक्ट हो गए, जहां से इन्हें जारी किया गया था।
आम आदमी अगर इस प्रमाणपत्र की जांच भी करता है तो उसे फर्जी होने की जानकारी नहीं हो पाती। सूत्रों का कहना है कि फर्जी वेबसाइट और पासवर्ड चोरी होने से इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है। इसमें विभागीय विभीषणों से इंकार नहीं किया जा सकता है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जांच करा रहे हैं।
दो दिन पहले ही निगम पहुंचा चौंकाने वाला मामला
दो दिन पहले ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आ गया। रामपुर गार्डन निवासी बुजुर्ग दिनेश गिरी जब अपने मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ नगर निगम पहुंचे तो स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गयी। बुजुर्ग ने कहा कि किसी ने मेरा मुत्यु प्रमाण पत्र बना दिया है। यह प्रमाण पत्र कहां से बना इसकी जांच होनी चाहिए। बुजु़र्ग की शिकायत पत्र पर जांच पड़ताल की गई, जो मृतक प्रमाण पत्र बनाया गया वह फर्जी है।
प्रापर्टी की बिक्री में फर्जी प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग की आशंका
फर्जी मत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर जीवित व्यक्ति की तमाम संपत्तियों में खुर्द-बुर्द करना आसान हो जाता है। जब तक व्यक्ति जिंदा साबित करने के लिए सरकारी सिस्टम के भूलभुलैया के चक्कर काटता रहेगा, तब तक उसे बड़ा नुकसान होने की संभावना बन जाती है। ऐसे ही पीड़ित दिनेश गिरी का कहना था कि उनकी गोंडा जिले में जमीन है, जिसको कुछ लोगों ने बेचने के लिए किसी सेंटर से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया है।
