पीलीभाीत: बंद मकान से चोर समेट ले गए तीन लाख का सामान
अमृत विचार, पीलीभाीत। पुलिस पुरानी घटनाओं का खुलासा करने में कामयाब नहीं हो सकी है। वहीं, चोर लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। शहर से देहात तक चोरों के गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस की तमाम नीतियां धरातल पर हवा हवाई साबित हो रही है। एक बार फिर चोरों ने शहर में दस्तक दी। बंद …
अमृत विचार, पीलीभाीत। पुलिस पुरानी घटनाओं का खुलासा करने में कामयाब नहीं हो सकी है। वहीं, चोर लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। शहर से देहात तक चोरों के गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस की तमाम नीतियां धरातल पर हवा हवाई साबित हो रही है। एक बार फिर चोरों ने शहर में दस्तक दी।
बंद मकान का ताला तोड़कर घुसे चोर कमरों में रखे नकदी-जेवरात समेत लाखों का सामान समेट ले गए। परिवार वाले भैया दूज मनाने के लिए बरेली गए हुए थे। वापस आने पर घटना की जानकारी हुई तो होश उड़ गए। कोतवाली पुलिस ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस छानबीन में जुटी है। मगर, कोई खास क्लू नहीं मिल सका है।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला देश नगर के निवासी राहुल देव शर्मा ने बताया कि छह नवंबर की शाम साढ़े पांच बजे वह मकान को ताला लगाकर भैया दूज मनाने के लिए बरेली गए थे। उसके बाद से परिवार समेत वहीं पर रुके हुए थे। इस बीच चोरों ने बंद मकान को निशाने पर ले लिया। मेनगेट पर लगे ताले काटकर चोर भीतर प्रवेश कर गए। उसके बाद कमरों में लगे तालों को तोड़कर कमरों में रखे सामान को खंगालना शुरू कर दिया।
यहां से चोर सोने का हार, दो अंगूठी, दो चूड़ी, दो जोड़ सोने की चेन, नकदी और अन्य समेत तीन लाख कीमत का सामान चोरी कर ले गए। बीते दिन वह परिवार के साथ वापस आए। मेनगेट का ताला टूटा और भीतर सामान बिखरा मिला। यह देख उनके होश उड़ गए। चोरी का शोर मचते ही आसपास के लोग जमा हो गए। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मगर, पहले कोतवाली पुलिस टालमटोल करती रही। फिर उन्होंने सूचना एसपी काे दी।
मामला एसपी तक पहुंचने के बाद कोतवाली पुलिस हरकत में आई। इसके बाद कोतवाली पुलिस और एसओजी टीम ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई। मगर, कोई पुख्ता सुराग पुलिस नहीं जुटा सकी। पूर्व की घटनाओं की भांति रटे रटाए जल्द खुलासे के बयान देकर चली गई। सीओ सुनील दत्त ने बताया कि तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है। सुरागरसी को टीमें लगी हुई है, जल्द खुलासा किया जाएगा।
एफआर पर लगे लगाम, तो बने कुछ बात
चोरी की घटनाओं को लेकर लंबे समय से पुलिस का लापरवाह रवैया बना हुआ है। पहले तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में टालमटोल करती रही। दबाव बढ़ने पर एफआईआर दर्ज कर ली गई। तो उसके बाद भी कार्रवाई को गति नहीं मिलती। पुलिस सुरागरसी पर ध्यान नहीं देती। बीते समय में हुए खुलासों पर ध्यान दें तो मोबाइल सर्विलांस के आधार पर खुलासे हो सके।
अन्यथा जो भी चोर हत्थे चढ़ गए उन्हीं पर घटनाओं को खोलकर पीठ थपथपा ली गई। सुरागरसी कर खुलासे तक पहुंचना और अपराधी को जेल भेजने पर किसी का ध्यान नहीं। अधिकांश मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर अफसर मातहतों की ओर से खेले जा रहे फाइनल रिपोर्ट लगाने के खेल पर सख्ती कर दें तो कुछ असर जरूर दिखेगा।
दो टीमें लगाई, मगर काम नहीं आई
चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए एसपी की ओर से दो टीमें लगाई गई थी। इन्हें खासकर चोरों की धरपकड़ करने के निर्देश दिए गए। मगर, अभी तक की छानबीन के बाद भी सुराग जुटाने में टीमें कामयाब नहीं हो सकी है। इतना जरूर जल्द खुलासा करने के दावे करने वाले अफसर खुद ही पुरानी घटनाओं को भुला चुके हैं।
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