बरेली: सरदार पटेल की जिन्ना से तुलना करने पर अखिलेश यादव के विरुद्ध वाद दायर

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विधि संवाददाता, बरेली, अमृत विचार। 31 अक्टूबर को हरदोई के माधोगंज में सपा की जनसभा के दौरान लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से करने के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव घिरते नजर आ रहे हैं। उनके इस बयान से राजनैतिक वबंडर …

विधि संवाददाता, बरेली, अमृत विचार। 31 अक्टूबर को हरदोई के माधोगंज में सपा की जनसभा के दौरान लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की तुलना मोहम्मद अली जिन्ना से करने के मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव घिरते नजर आ रहे हैं। उनके इस बयान से राजनैतिक वबंडर मचा हुआ है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। उस बयान पर वीरेन्द्र पाल गुप्ता एडवोकेट ने अखिलेश यादव के विरुद्ध एसीजेएम तृतीय आशुतोष-द्वितीय की अदालत में परिवाद दायर किया है।

एसीजेएम-तृतीय की गैर मौजूदगी में परिवाद न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम ज्योति वर्मा की अदालत में पेश हुआ। कोर्ट ने परिवाद पर वादी मुकदमा वीरेन्द्र गुप्ता एडवोकेट के बयान दर्ज करने के लिए 2 दिसंबर की तिथि नियत की है। वाद पत्र में उल्लेखित किया कि जिन्ना ने सदा ही अलग मुस्लिम राष्ट्र की महत्वाकांक्षा रखी।

उन्होंने वर्ष 1942 में कांग्रेस द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध चलाये ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का भी विरोध किया था। जिन्ना की मांगों के कारण ही भारत का विभाजन हुआ। जबकि सरदार पटेल ने भारत की विभिन्न रियासतों का भारत में विलयकर देश के एकीकरण एकता और अखंडता के लिए अविस्मरणीय, अतुल्य एवं महान कार्य किया है।

वीरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि जिन्ना की सरदार पटेल से तुलना करते हुए महिमा मंडित करने वाला बयान देश एवं राष्ट्रीयता का अपमान है। सरदार पटेल जैसे महापुरुष के प्रति लांक्षन एवं मानहानिकारक है। अखिलेश यादव ने देश की स्वतंत्रता एवं एकता के लिए हर स्वतंत्रता सेनानी, सैनिक एवं राष्ट्रभक्त का अपमान किया है।

इन धाराओं के तहत दायर किया है वाद
धारा 153(1)- कोई व्यक्ति अगर लिखित या मौखिक रूप से ऐसा बयान देता है जिससे साम्प्रदायिक दंगा या तनाव फैलता है या समुदायों के बीच शत्रुता पनपती है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। इसमें जुर्माने के साथ छह माह से एक साल कैद की सजा हो सकती है। धारा 500 आईपीसी के अनुसार, जो कोई किसी अन्य व्यक्ति की मानहानि करेगा तो उसे किसी एक अवधि के लिए सादा कारावास से जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

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