नेपाल के मुसलमान बरेली को मानते हैं अपना मरकज

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बरेली, अमृत विचार। आलाहजरत समेत उनके खानदान ने दशकों से नेपाल की सरजमीन पर दीनी खिदमात अंजाम दी हैं। नेपाल में सूफी-सुन्नी और खानकाही विचारधारा का वजूद बरेली मसलक के कारण ही है। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां ने भी नेपाल के सुन्नी उलेमा और मुफ्तियों से रिश्तों को …

बरेली, अमृत विचार। आलाहजरत समेत उनके खानदान ने दशकों से नेपाल की सरजमीन पर दीनी खिदमात अंजाम दी हैं। नेपाल में सूफी-सुन्नी और खानकाही विचारधारा का वजूद बरेली मसलक के कारण ही है। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां ने भी नेपाल के सुन्नी उलेमा और मुफ्तियों से रिश्तों को मज़बूत करने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। जिसके चलते नेपाली उलेमा की मरकजे अहले सुन्नत पर आमद बीते दिनों में बढ़ी है।

शनिवार को नेपाल के प्रदेश नंबर 5 से नेपाली उलेमा का एक प्रतिनिधिमण्डल दरगाह आलाहजरत पहुंचा। जिसका टी.टी.एस. के पदाधिकारियों परवेज खां नूरी, औरंगजेब खां नूरी, शाहिद खां नूरी, ताहिर अल्वी, हाजी जावेद खां, अजमल नूरी, मंजूर खां, शान रजा, साजिद रजा आदि ने मंजरे इस्लाम के शिक्षक मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी की नेतृत्व में स्वागत किया और दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां समेत सज्जादानशीन अहसन मियां से मुलाकात कराई।

प्रतिनिधिमण्डल ने नेपाल में दरगाह प्रमुख द्वारा राहत सामग्री वितरण के लिए शुक्रिया अदा किया और अहसन मियां को नेपाल आने की दावत दी। इस मौके पर मोहम्मद जुबैर रजा खां और तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी साहब ने आलाहजरत की किताबें देकर उलेमा को सम्मानित किया।

प्रतिनिधिमण्डल ने बताया कि नेपाल के 90 प्रतिशत मुसलमान आलाहजरत को अपना रहनुमा और दरगाहे आलाहजरत को अपना मरकज मानते हैं। नेपाल से आए प्रतिनिधिमण्डल में मौलाना गुलाम मुस्तफा रजवी, मौलाना अब्दुल कय्यूम रजवी , मौलाना अली हुसैन नूरी , हाजी नसीर अहमद आदि शामिल रहे।

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