कृषि कानूनों की वापसी अहंकार की हार: अखिलेश यादव
लखनऊ। तीन कृषि कानून की वापसी के फैसले को बीजेपी के अहंकार की हार बताते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में हार के डर से केन्द्र सरकार ने मजबूरी में यह कदम उठाया है। अखिलेश ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों …
लखनऊ। तीन कृषि कानून की वापसी के फैसले को बीजेपी के अहंकार की हार बताते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में हार के डर से केन्द्र सरकार ने मजबूरी में यह कदम उठाया है। अखिलेश ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चुनाव में हार के डर से कृषि कानून वापस लेने वाली सरकार से किसानों को सावधान रहना होगा।
क्या गारंटी है कि चुनाव के बाद वह एक बार फिर से इन कानूनों को अन्नदाताओं पर थोप दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आज महोबा जा रहे हैं। जहां भाजपा के कार्यकाल में किसानों ने सबसे ज्यादा आत्महत्यायें की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अब बताना होगा कि वह एमएसपी के लिये कानून कब बनेगा।
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प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि उनकी सरकार ने मंडी के लिये पैसा दिया। क्या वह बताएंगे कि किस मंडी में किसानों से उनकी उपज की खरीद की जा रही है। मंडियों को कितना बजट दिया गया है। खाद, डीएपी, कीटनाशक दवाएं महंगी कर दी गई हैं। इस सरकार ने मंडियों को सुधारने का कोई इंतजाम नहीं किया है। इसके अलावा महोबा, बांदा, हमीरपुर, जालौन और झांसी में मंडियों में क्या सरकार ने पैसा दिया। सपा अध्यक्ष ने कहा कि काले कृषि कानूनों की वापसी अहंकार की हार है।
यह किसानों और लोकतंत्र की जीत है…
कृषि कानूनों की वापसी के लिए आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों की जान चली गयी। इन किसानों की मौत के आगे भाजपा सरकार की झूठ की माफी नहीं चलेगी। भाजपा सरकार को इस कृत्य के लिये सामूहिक इस्तीफा देना चाहिये और हमेशा के लिये राजनीति छोडने का वचन देना चाहिये वरना किसान सरकार को माफ करने के बजाय साफ करने का काम चुनाव में करेगा।
