सीतापुर: बाढ़ पीड़ितों से फसल सत्यापन के नाम पर हो रही वसूली
सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद पीड़ित किसानों के सामने एक और मुश्किल आ खड़ी हुई है। यह मुश्किल किसी और ने नहीं उन्हें राहत पहुंचाने के लिए लगाए गए सरकारी महकमे के कुछ जिम्मेदारों ने ही पैदा कर रखी है। दरअसल बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को राहत …
सीतापुर। जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद पीड़ित किसानों के सामने एक और मुश्किल आ खड़ी हुई है। यह मुश्किल किसी और ने नहीं उन्हें राहत पहुंचाने के लिए लगाए गए सरकारी महकमे के कुछ जिम्मेदारों ने ही पैदा कर रखी है। दरअसल बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक सराहनी कदम उठाया था। कहा गया था कि जिन बाढ़ पीड़ितों की फसलें सैलाब में बह गई हैं या नष्ट हो गई हैं, ऐसे किसानों और उनकी नष्ट हुई फसलों का सत्यापन कर उन्हें मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार के इस आदेश पर अमल करने के लिए क्षेत्रीय प्रधानों व लेखपालों आदि को लगाया गया है। इसी सिलसिले में जिले के गांजरी क्षेत्र सकरन विकास खंड में एक हैरान कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। शिकायत मिल रही है कि सरकारी महकमे के कुछ जिम्मेदार किसानों को मुआवजा दिलाने के नाम पर सत्यापन सूची में उनका नाम शामिल करने के बदले उनसे धन उगाही कर रहे हैं।
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बाढ़ की विभीषिका में अवसर तलाश करने वाले कुछ जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा करने वाला एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें कुछ ग्रामीण एक जगह एकत्र हैं और वह चर्चा कर रहे हैं कि फसल नुकसान का सत्यापन करने के लिए लेखपाल सौ से दो सौ रुपए बीघा रूपए ले रहे हैं। रुपए देने वाले किसानों का नाम ही सूची में डाला जा रहा है। वायरल वीडिया सकरन विकास खंड के किसी गांव का बताया जा रहा है। हालांकि ऐसे चर्चाएं पहले से ही आ रही हैं कि किसानों से सत्यापन के नाम पर धन उगाही की जा रही है।
कुछ लोगों का यहां तक दावा है कि बाढ़ पीड़ित किसानों से सौ से दो सौ रुपए बीघा तक लिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि जो किसान पैसा नहीं दे रहा है, उसका सत्यापन नहीं किया जा रहा है। ऐसी स्थित में किसानों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले प्राकृतिक आपदा ने किसानों को बर्बाद किया और अब उन्हें आबाद करने के लिए लगाए जिम्मेदार ही उनसे वसूली कर रहे हैं।
