बरेली: अफसरों की मनमानी पर संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का प्रदर्शन

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बरेली, अमृत विचार। मांगों की अनदेखी से नाराज स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों ने मंगलवार को कार्य बहिष्कार कर जिला अस्पताल स्थित सीएमओ कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे गए और नारेबाजी की। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित सीएमओ कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा। कहा कि सात सूत्रीय मांगों को लेकर काफी समय से आवाज उठाते …

बरेली, अमृत विचार। मांगों की अनदेखी से नाराज स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों ने मंगलवार को कार्य बहिष्कार कर जिला अस्पताल स्थित सीएमओ कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे गए और नारेबाजी की। बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित सीएमओ कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा। कहा कि सात सूत्रीय मांगों को लेकर काफी समय से आवाज उठाते आ रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने सात प्रमुख मांगें रखीं जिसमें कहा कि सभी संविदा कर्मचारियों को स्थायी किया जाए। वेतन पॉलिसी एवं वेतन विसंगित दूरी की जाए। नौकरी सुरक्षा व 7वें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए। रिक्त पदों पर स्थानांतरण प्रक्रिया को बहाल कर कर्मियों को उनकी इच्छानुसार तैनाती दी जाए।

आउटसोर्स नीति को समाप्त कर जिला स्वास्थ्य समिति एवं राज्य स्वास्थ्य समिति के तहत समाजोजित किया जाए। संविदा कर्मचारियों को बीमा पॉलिसी का निर्धारण किया जाए। सेवा के दौरान अगर किसी भी कर्मचारी की मौत होती है तो उसके परिवार को आर्थिक मदद दी जाए। आयुष्मान योजना के तहत कर्मचारी व उसके परिवार को गोल्डन कार्ड बनाया जाए। आशा बहुओं का नियत मानदेय निर्धारित किया जाए।

सात सूत्रीय मांगों को लेकर काफी समय से आवाज उठाते आ रहे हैं पर उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। जिसके चलते जनपद भर के संविदा कर्मचारियों ने मजबूरन धरना-प्रदर्शन शुरू करना पड़ा। -डा. अतुल कुमार शर्मा

कोविड-19 के दौरान हम संविदा कर्मचारियों ने जान पर खेलकर मरीजों की सेवा की। घर परिवार से दूर रहे। अब हम लोगों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई, पर शासन व विभागीय अफसरों की ओर से लगातार अनदेखी की जा रही है। -श्याम सिंह

सरकारी अवकाश के दिन भी हम कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाया जाता है। पूरे दिन मेहनत करते हैं, लेकिन हमारी मेहनत को कोई भी देखने और सुनने वाला नहीं है। आखिर हम भी इंसान है, हमारा भी परिवार है। हमारी मांगों पर ध्यान दिया जाए। -पुष्पेंद्र यादव

प्रदेश भर में करीब एक लाख की संख्या में संविदा कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं जिसमें डाक्टर, पैरामेडिकल, मैनेजमेंट व अन्य स्टाफ हैं। वहीं दो लाख से ज्यादा आशा बहुएं दिन रात मेहनत कर रही है, लेकिन मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा है। -डा. मनमोहन

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