उन्नाव: जिम्मेदारों की अनदेखी से किसानों में पनप रहा आक्रोश, जानें पूरा मामला
उन्नाव। किसानों की दशा और दिशा सुधारनें में चकबंदी विभाग की अहम भूमिका होती है। अलग अलग स्थानों पर बंटे किसानों के खेतों को एक जगह कर उनके श्रम और समय में बचत कर उनकी तरक्की का रास्ता भी यही विभाग प्रसस्त करता है। हलांकि जब जुम्मेवारों ने ही इस अहम मसले पर अनदेखी करने …
उन्नाव। किसानों की दशा और दिशा सुधारनें में चकबंदी विभाग की अहम भूमिका होती है। अलग अलग स्थानों पर बंटे किसानों के खेतों को एक जगह कर उनके श्रम और समय में बचत कर उनकी तरक्की का रास्ता भी यही विभाग प्रसस्त करता है। हलांकि जब जुम्मेवारों ने ही इस अहम मसले पर अनदेखी करने की चादर ओढ रखी हो तो जिला स्तर से प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर तक शासन सत्ता की बदनामी कराने से कोई रोक नहीं सकता। आज जब चुनावी समय में देश भर में किसान राजनीति का केंद्र बने हैं। ऐसे में बीते कई वर्षों से चकबंदी विभाग की कारगुजारियों का दंश झेल रहे एक गांव के किसान व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं।
यह मामला सदर तहसील के कोरारी कलां गांव का है। जहां किसानों की पहल पर ग्राम पंचायत की खुली बैठक के बाद जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रस्ताव पर चकबंदी का गजट 9 अप्रैल 2016 में हुआ था। शासनादेश के मुताबिक इस प्रक्रिया को पूर्ण करने की निर्धारित समयावधि पूरी हो चुकी है बावजूद इसके अभी तक प्रक्रिया अपूर्ण है। जिससे इस क्षेत्र विशेष के रहने वाले किसान स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
भूलेख व मौके की स्थिति में 48 फीसदी का अंतर
क्षेत्रीय किसानों से मिली जानकारी के मुताबिक यहां भूलेख नक्शे व मौके की स्थिति में तकरीबन 48 फीसदी का अंतर है। किसानों ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर दावा किया कि उप जिलाधिकारी ने जिले के हाकिम को जो रिपोर्ट भेजी है। उसमें नक्शे के सापेक्ष मौके की स्थिति में 48 फीसदी के अंतर का जिक्र किया है। नतीजन किसानों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है। आरोप यह भी है कि सर्वे भूचित्र से रकबा बरारी का कार्य कर रहे कर्मचारियों को साजिशन गैर जनपद स्थानांतरित कर सरकार की छवि को धूमिल करने का कुचक्र रचा जा चुका है।
1981 से शुरू हुई प्रक्रिया अभी तक अपूर्ण
किसानों की माने तो वर्ष 1981 में इससे पूर्व गांव में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 2010 तक चलती रही। इन तकरीबन 30 वर्षों के अंतराल में उक्त प्रक्रिया को अकारण ही निरस्त करा दिया गया। जो अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
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