रामपुर: नवाब संपत्ति प्रकरण- 2600 करोड़ से अधिक की संपत्ति, 18 पक्षकार और 34 पन्नों में आया फैसला
रामपुर, अमृत विचार। दो साल चार माह और छह दिन की अवधि के बाद आखिरकार जिला जज की कोर्ट ने नवाब संपत्ति प्रकरण में अपना फैसला सुना दिया। संपत्ति बंटवारे को शरीयत के अनुसार कराने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे। करीब 2600 करोड़ से अधिक की ये संपत्ति कुल 18 पक्षकारों के मध्य …
रामपुर, अमृत विचार। दो साल चार माह और छह दिन की अवधि के बाद आखिरकार जिला जज की कोर्ट ने नवाब संपत्ति प्रकरण में अपना फैसला सुना दिया। संपत्ति बंटवारे को शरीयत के अनुसार कराने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे। करीब 2600 करोड़ से अधिक की ये संपत्ति कुल 18 पक्षकारों के मध्य बंटनी है। इसका फैसला 34 पेज में करके जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट को भेजा है।
रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की करीब 2,600 करोड़ से अधिक की संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया में कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। करीब दो साल और चार माह से भी अधिक समय के बाद कोर्ट ने 34 पन्नों में अपना फैसला सुनाया है। इसमें सभी पक्षकारों को प्रत्येक संपत्ति में हिस्सा दिया गया है। कोर्ट ने अपने फैसले का आधार पूर्व में पेश की गई 143 पन्नों की प्रस्तावित विभाजन योजना को बनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को जिला जज की कोर्ट को रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति बंटवारे को शरीयत के अनुसार कराने के निर्देश दिए थे। इसमें ये संपत्ति कुल 18 पक्षकारों के मध्य बंटनी है। हालांकि कोर्ट प्रक्रिया के दौरान दो पक्षकारों की मौत हो गई। संपत्ति में उनके भी शेयर (अंश) निर्धारित किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद कोर्ट ने चल-अचल संपत्ति के मूल्यांकन के लिए सर्वे और एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की थी। सर्वे और एडवोकेट कमिश्नर द्वारा करीब सवा साल की अवधि में चल-अचल संपत्ति का मूल्य निर्धारित कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 15 जुलाई 2021 को सभी पक्षकारों के मध्य 143 पन्नों की प्रस्तावित विभाजन योजना को पेश करते हुए आपत्तियां मांगी थीं, जिस पर पक्षकारों की ओर से आपत्तियां दाखिल की गई थीं।
इन आपत्तियों का कोर्ट द्वारा निस्तारण किया गया। कोर्ट मामले में छह दिसंबर को संपत्ति बंटवारे के संबंध में आदेश जारी किया, जिसमें प्रस्तावित विभाजन योजना को आधार बनाते हुए सभी पक्षकारों को शरीयत के अनुसार उनका शेयर(अंश) निर्धारित किया गया है।
नवाब संपत्ति में जो फैसला आया है उसका अध्ययन किया जा रहा है। इसमें अभी किसके हिस्से में किया आना है इसके बारे में न्यायालय को सुक्षाव दिया जाना है। -हर्ष गुप्ता, अधिवक्ता
