बरेली: ग्राम पंचायतों की आमदनी का जरिया बनेंगे हाट बाजार

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए सीडीओ ने जिले की समस्त ब्लाक में हाट बाजार खोलने का निर्णय लिया है। इस हाट बाजार में गांव में सड़क किनारे सब्जी, फल बिक्री आदि करने वाले अपनी दुकानें लगाएंगे। उनको बैठने के लिए चबूतरा और टीन शेड दिया जाएगा ताकि वह धूप और …

बरेली, अमृत विचार। ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए सीडीओ ने जिले की समस्त ब्लाक में हाट बाजार खोलने का निर्णय लिया है। इस हाट बाजार में गांव में सड़क किनारे सब्जी, फल बिक्री आदि करने वाले अपनी दुकानें लगाएंगे। उनको बैठने के लिए चबूतरा और टीन शेड दिया जाएगा ताकि वह धूप और बारिश के समय भी आसानी से सामानों की बिक्री कर सकें। जिले के भुता समेत तीन ब्लाकों में हाट बाजार का निर्माण पूरा होने के साथ ही यह गांव के लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं।

सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने बताया कि ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की ओर से तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं फिर भी पंचायतें बेहतर प्रदर्शन में चूक रही हैं। इसकी एक वजह यह भी कि उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या ग्रामीणों को अपने उत्पादों के बिक्री को लेकर आती है। जगह नहीं मिलने की वजह से उनको रोड किनारे या फिर ठेले पर दुकानें लगती हैं। इससे उनको काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इस मकसद से इनके बैठने और ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने की योजना बनाई है। जिले के समस्त ब्लाकों में हाट बाजार बनाने की जगह चिन्ह्ति करने के साथ ही निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

कुछ इस तरह होगी ग्राम पंचायतों की आय
मनरेगा विभाग के सहयोग से हाट बाजारों का निर्माण कराया जा रहा है। उपायुक्त मनरेगा गंगाराम वर्मा ने बताया कि हाट बाजार के निर्माण पर तीन से चार लाख रुपये की लागत है। यहां दो शेड डाले जा रहे हैं। सेडों में शौचालय, प्रकाश की व्यवसथा रहती है ताकि यहं आने वालों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अभी तक भुता, भदपुरा समेत तीन ब्लाकों में तीन हाट बाजार बन चुके हैं। शेष ब्लाकों में निर्माण कार्य जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि हाट बाजार बनने पर यहां दुकानदारों को निशुल्क जगह दी जाएगी। बाद में जब इनकी अच्छी आमदनी होने लगेगी तो जगह की नीलामी कर उनसे पैसा वसूला जाएगा। यहां पैसा ग्राम निधि खाते में जमा होगा। इससे जहां ग्राम पंचायत की आय बढ़ेगी तो वहीं संसाधन भी बढ़ने की पूरा संभावना बनी रहेगी।

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