हरदोई: लांसनायक दिवाकर का भरखनी गांव पहुंचा पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
हरदोई। हरदोई के पाली क्षेत्र के भरखनी गांव के 33 वर्षीय लांसनायक दिवाकर लाल बाजपेई पंजाब के फिरोजपुर में ड्यूटी पर शहीद हो गए । उनकी शहादत की खबर जब भरखनी गांव पहुंची, समूचा गांव शोक के समुंदर में डूब गया। वहीं परिजनों में कोहराम मच गया। गुरुवार को शहीद जवान दिवाकर लाल का पार्थिव …
हरदोई। हरदोई के पाली क्षेत्र के भरखनी गांव के 33 वर्षीय लांसनायक दिवाकर लाल बाजपेई पंजाब के फिरोजपुर में ड्यूटी पर शहीद हो गए । उनकी शहादत की खबर जब भरखनी गांव पहुंची, समूचा गांव शोक के समुंदर में डूब गया। वहीं परिजनों में कोहराम मच गया।
गुरुवार को शहीद जवान दिवाकर लाल का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो हजारों की तादाद में मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने जब तक सूरज चांद रहेगा, दिवाकर भैया का नाम रहेगा ‘ और ‘ दिवाकर लाल अमर रहे ‘ एवं ‘ भारत माता की जय’ के नारे लगाए । भरखनी गांव के सपूत के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ की आंखें नम थी।
गांव में एंबुलेंस के साथ पहुंचे आर्टिलरी जवान तिरंगे में लिपटे शहीद दिवाकर लाल के पार्थिव शरीर को लेकर उनके घर पहुंचे, जहां शहीद का ताबूत देखते ही पिता बालमुकुंद बाजपेई, मां गीता बाजपेई, शहीद की पत्नी शालिनी और बेटे लव और कुश सहित अन्य परिजन रोने बिलखने लगे। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए जब ताबूत को खोला गया तो दिवाकर लाल का चेहरा देखते ही परिजन उससे लिपट गए।
इसके बाद आर्टिलरी जवानों ने ताबूत को बंद कर दिया, और वहां से अंतिम यात्रा के लिए निकले। घर से गांव के बाहर तक जब उनके ताबूत को लाया जा रहा था, तो पीछे हजारों की भीड़ भारत माता की जय, और दिवाकर लाल अमर रहे के नारे लगा रही थी । लोगों की आंखें नम थी। भरखनी गांव में शहीद जवान को सवायजपुर एसडीएम स्वाति शुक्ला, सीओ शाहाबाद सतेंद्र कुमार सिंह व थानाध्यक्ष पाली संदीप कुमार सिंह, ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर श्रद्धांजलि दी ।
शहीद दिवाकर लाल साल 2009 में सेना में हुए थे भर्ती
भरखनी गांव के बालमुकुंद बाजपेई के तीसरे पुत्र दिवाकर लाल ने साल 2008 में सेना भर्ती देखी लेकिन अगले साल 2009 में दिवाकर लाल बाजपेई का सपना साकार हो गया और वह भारतीय सेना के सदस्य बन गए। भतीजे प्रियंक बाजपेई ने बताया कि दिवाकर लाल कार्यकुशलता के चलते सेना में लांसनायक बना दिये गए, यह 3 मीडियम रेजीमेंट में आर्टिलरी से जुड़े थे।
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