रामपुर: नवाब संपत्ति प्रकरण- जिला जज की कोर्ट में करीब दो साल तक चली सुनवाई
रामपुर, अमृत विचार। नवाब की संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली है सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला कोर्ट तक यह मामला 49 साल चला। रामपुर रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खां की संपत्ति का बंटवारा शिया शरीयत के मुताबिक 31 दिसंबर 2020 तक किया जाना था। लेकिन कोरोनाकाल के चलते इसका …
रामपुर, अमृत विचार। नवाब की संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली है सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला कोर्ट तक यह मामला 49 साल चला। रामपुर रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खां की संपत्ति का बंटवारा शिया शरीयत के मुताबिक 31 दिसंबर 2020 तक किया जाना था। लेकिन कोरोनाकाल के चलते इसका समय 31 दिसंबर 2021 तक कर दिया गया था।नवाबों की अचल सपंत्ति में कोठी खास बाग,लक्खी बाग, बेनाजीर,और नवाब के रेलवे स्टेशन की बिल्डिग भी शामिल है।
चल संपत्ति का मूल्याकंन नोएडा की निजी कंपनी ने किया था।जिसकी रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।निजी कंपनी ने चल संपत्ति का मूल्याकंन 64 करोड़ रुपये किया है। इससे पूर्व अचल संपत्ति कोठी खास बाग शाहबाद की कीमत सात अरब से अधिक दिखाई गई। पक्षकार नवाब काजिम अली खान ने बताया कि चीफ जस्टिस की ट्रिपल बेंच ने जिला जज को बंटवारा करने का आदेश दिया था।प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब जिला जज की अदालत ने बंटवारा किया है बंटवारे की स्कीम सुप्रीम कोर्ट दिल्ली भेज दी है।
पांच संपत्तियों में शामिल
जिले में शहर में मौजूद भव्य इमारत कोठी खास,बाग पैलेस,और इसका परिसर,तहसील शाहबाद में कोठी शाहबाद और इसकी आराजी,शहर किनारे बाग़ बेनजीर एवं कोठी और बद्रे मुनीर का महल है। सिविल लाइन में रेलवे स्टेशन के बराबर निजी नवाब स्टेशन और शहर किनारे सर्कुलर रोड पर मौजूद कुंडे का तालाब खास तौर से इन पांच संपत्तियों में शामिल हैं,जबकि इसके अलावा भी संपत्ति है।
नायाब किस्म की चीजें शामिल
जिले में शहर और तहसीलों में मौजूद महल और कोठियों के अलावा आखिरी नवाब की चल संपत्ति में ताज,सिंहासन,झाड़,फानूस,फर्नीचर,पोर्सिलेन,पॉटरी,डिनर सेट,गद्दी,क्रिस्टल,पेंटिंग्स,कारपेट,प्रतिमाओं के साथ साथ नायाब किस्म की चीजें शामिल हैं। हथियार अस्लहे आर्मरी भी मौजूद है।हालांकि इसकी वैल्यूएशन कोर्ट द्वारा लगाई गई है।लेकिन पक्षकार नवाब काजिम अली खान खुद भी इस की वैल्यूएशन कराना चाहते हैं।
चोरी भी हुई थी ऐतिहासिक
जिले के इमामबाड़े में ऐतिहासिक चोरी हुई थी।जिसमें छत की दीवारें काटकर और लोहे की डेढ़ फुट की दीवारें काटकर खजाना चोरी हो जाने की घटना प्रकाश में आई थी।इसमें सोने से जड़े हुए अलम, हीरे,जवाहरात,याकूत नीलम तमाम बेशकीमती खजाना चोरी गया था।इस घटना के बारे में नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां का कहना है कि वह कोई चोरी नहीं हुई थी बल्कि उनके चाचा नवाब मुर्तजा अली खान के इंतकाल के बाद उनकी चाची बेगम आफताब जमानी ने उस खजाने को खुर्द बुर्द किया था, क्योंकि उस खजाने को लूटा नहीं जा सकता था।इसको चोरी दिखाया गया था।
उनके चाचा नवाब मुर्तजा अली खान की बेगम यानी उनकी चाची बेगम आफताब जमानी के पास खजाने की चाबियां रहती थीं।स्ट्रांग रूम में मौजूद डेढ़ फुट की लोहे की दीवारों में कैद खजाने की तिजोरी को प्रशासन की मौजूदगी में काटने के लिए 10 दिन लगे थे। तिजोरी दुनिया की मशहूर चाबी कंपनी ने बनाई थी जिसे अभी हाल में अदालती प्रक्रिया के दौरान काटने में 10 दिन लगे थे।
