केजीएमयू में मरीज ले जाने से पहले हो जाएं सावधान! डॉक्टरों के वेश में घूमते हैं बहरूपिया
लखनऊ। राजधानी के नामचीन अस्पताल केजीएमयू के ट्राम में बेहतर उपचार की उम्मीद को लेकर मरीज पहुंचते हैं। लेकिन यदि ट्रामा सेंटर इमरजेंसी में आप मरीज को एडमिट कराने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। रात में यहां डॉक्टरों के नाम पर कुछ बहरुपिए भी घूम रहे हैं, जो बेड की किल्लत बता निजी …
लखनऊ। राजधानी के नामचीन अस्पताल केजीएमयू के ट्राम में बेहतर उपचार की उम्मीद को लेकर मरीज पहुंचते हैं। लेकिन यदि ट्रामा सेंटर इमरजेंसी में आप मरीज को एडमिट कराने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। रात में यहां डॉक्टरों के नाम पर कुछ बहरुपिए भी घूम रहे हैं, जो बेड की किल्लत बता निजी अस्पतालों में पहुंचा देते हैं। जिसके बाद मरीजों से उपचार के नाम पर शुरु होता है लूट-खसोट का खेल।
दरअसल, बीते सोमवार को देर रात 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में एडमिट कराने के लिए परिजन पहुंचे तो एक डॉक्टर ने बताया कि बेड फुल हो गए हैं। निजी अस्पताल में उसकी अच्छी पहचान है वहां बेहतर उपचार मिल जाएगा। जिसके बाद मरीज को वहां भेज दिया गया और इलाज के नाम पर हजारों रुपए वसूले गए। बता दें कि बुजुर्ग महिला सीमा मल्होत्रा (बदला हुआ नाम) का एक्सीडेंट होने पर परिजन ट्रामा लेकर पहुंचे थे। पहले तो उनको एक घंटे तक बैठाए रखा गया बाद में बेड नहीं होने का हवाला देकर एडमिट करने से मना कर दिया।
सीमा के बेटे के मुताबिक ट्रामा में अभिषेक नाम बताने वाले डॉक्टर ने उनको बताया कि प्राइवेट अस्पताल ले जाइए। यही नहीं नक्खास रोड स्थित निजी अस्पताल रुखसाना में फोन करके वहां बेड भी बुक करा दिया। मरीज के परिजनों से लिखित में ये लिया गया कि हम खुद ही अस्पताल से जा रहे हैं हमें डिस्चार्ज नहीं किया गया है। वहीं प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टरों ने सीमा को आईसीयू में एडमिट कर हाथ में 10 टांके लगाए और 14 हजार रुपए ऐंठ लिए। जबकि डॉक्टर की तरफ से चार हजार रुपए फीस अलग से ली गई। आरटीपीसीआर टेस्ट और दवाईयों के लिए करीब 3000 रुपए अलग से लिए। परिजनों का आरोप है कि यदि ट्रामा में बेहतर इलाज मिल जाता तो 21 हजार रुपए बेकार नहीं जाते।
सीसीटीवी से पकड़ी जा सकती है चोरी
बता दें कि सुरक्षा के लिए केजीएमयू ट्रामा सेंटर में मरीजों को गुमराह करने वाले डॉक्टरों की चोरी पकड़ी जा सकती है। यदि किसी डॉक्टर की मरीजों से अस्पताल में बातचीत होती है तो एडमिट होने के बजाए बाहर क्यों चले जाते हैं।
“केजीएमयू ट्रामा सेंटर से किसी भी मरीज को प्राइवेट अस्पताल में रेफर नहीं किया जाता है। बेड खाली नहीं हो तो दूसरे सरकारी अस्पतालों से बातचीत कर वहां भेजने का नियम है। किस डॉक्टर ने ऐसा किया उनको इसकी जानकारी नहीं है। यदि पीड़ित पक्ष लिखित में शिकायत या डॉक्टर की पहचान करता है तो अस्पताल प्रशासन की तरफ से सख्त एक्शन लिया जाएगा। अस्पताल का कोई भी डॉक्टर मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं कर सकता है”…केजीएमयू ट्रामा सेंटर, प्रवक्ता डॉक्टर संदीप तिवारी।
