बरेली: एक साल बाद आंदोलन खत्म होने का किसानों ने किया स्वागत
बरेली, अमृत विचार। केंद्र सरकार द्वारा एमएसपी पर एक कमेटी बनाकर निर्णय लेने, किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी, मृत किसानों को मुआवजा देने समेत कई अन्य मांगे मान लेने पर दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर एक साल से ज्यादा समय से धरना दे रहे किसान संगठनों से पीछे हटने का ऐलान करते हुए आंदोलन …
बरेली, अमृत विचार। केंद्र सरकार द्वारा एमएसपी पर एक कमेटी बनाकर निर्णय लेने, किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी, मृत किसानों को मुआवजा देने समेत कई अन्य मांगे मान लेने पर दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर एक साल से ज्यादा समय से धरना दे रहे किसान संगठनों से पीछे हटने का ऐलान करते हुए आंदोलन खत्म कर दिया है। केंद्र सरकार के इस निर्णय का सभी किसान संगठनों ने स्वागत किया है। इसके साथ ही 11 दिसंबर को विजय दिवस मनाने की बात कहते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि एमएसपी के कानूनी अधिकारी सुरक्षति होने तक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
अगर सरकार ने समझौते से दाएं-बाएं किया तो हम फिर आंदोलन करेंगे। आजादी के बाद ये सबसे बड़ा और शांतिपूर्ण जनवादी आंदोलन रहा है। हम किसी जाति के नहीं सिर्फ किसान हैं। ये लड़ाई अन्य मुद्दों पर भी आगे चलती रहेगी। -गजेंद्र सिंह, भाकियू जिलाध्यक्ष
सभी किसान लंबे समय तक बॉर्डर पर जमे रहे। यह किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत है। 75 सालों में पूरी दुनिया में ऐसा आंदोलन नहीं हुआ। ये कानून किसानों के खिलाफ और कॉरपोरेट के पक्ष में थे। इसलिए यह पूरे देश का आंदोलन था। -जयवीर सिंह, सेवानिवृत्त बीडीओ
एक साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार किसानों की जीत हुई है। तीनों कृषि कानून वापस लेने के साथ सभी मांगे सरकार द्वारा मानी जाने से किसानों में काफी खुशी व उत्साह है। इस जीत का श्रेय आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को ही जाता है। -रवि नागर, किसान नेता
तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने भीषण गर्मी, बारिश व ठंड के मौसम की मार के साथ साथ पुलिस की मार सहते हुए अपनी तपस्या भंग नहीं की। ऐसे में अब सरकार के निर्णय पर किसानों की जीत होने से किसान गौरव के साथ अपने घरों की वापसी करेंगे। -सर्वेश पाठक, किसान नेता
उद्यमियों ने भी जताई खुशी, बोले- किसानों और सरकार का धन्यवाद
एक साल से अधिक चले किसान आंदोलन के दौरान उद्योगों पर भी काफी असर पड़ा है। पंजाब आदि समेत कई अन्य राज्यों में जो इकाइयां चल रही थीं। उनमें काफी संख्या में मजदूरों की कमी हो गई थी। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ा। अब उद्यमी आंदोलन का समाधान निकलने पर किसानों और सरकार का धन्यवाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि काम-धंधा मंदा होने की वजह यहां की इकाईयों में पर्याप्त मात्रा में माल तैयार नहीं हो पा रहा था। कच्चे माल समेत कई अन्य तरह के उत्पादों की आपूर्ति भी कम हो गई थी। ऐसे में अब कारोबार को गति मिलने के साथ ही बाजार में तेजी दिखेगी।
अब उद्योगपति दिल्ली आसानी से आ-जा सकेंगे। साथ ही माल लाने और भेजने में भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। डिस्ट्रीब्यूटर बाहर से आते थे तो यहां पहुंचने में दिक्कत होती थी। अब यहां आसानी से आ सकेंगे। मजदूरों के अंदर भी जो डर बना हुआ था वह खत्म होगा। -सुरेश सुंदरानी, उद्यमी
काफी लंबे समय से लोगों को दिल्ली आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बॉर्डर बंद होने के कारण सभी को खराब रास्तों से घूमकर जाना पड़ रहा था, इससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा था, बल्कि वाहनों से आने-जाने में भी काफी परेशानी आ रही थी। -बिमल रेवाड़ी, उद्यमी
किसान आंदोलन के चलते दिल्ली से कच्चा माल लाने व तैयार माल ले जाने के लिए उद्यमियों को अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा था। ऐसे में अब आंदोलन खत्म होने से स्थानीय उद्योगों में काम धंधे पटरी पर लौटेंगे। दिल्ली से आवागमन के रास्ते मिलेंगे तो व्यापार भी निश्चित दौड़ेगा। इससे रोजगार के भी अवसर मिलेंगे। -संजय सिंह, उद्यमी
करीब एक साल से जारी आंदोलन से न केवल उद्योगपतियों का बल्कि श्रमिकों का काफी नुकसान हो रहा था। अब दिल्ली बॉर्डर खुलने से कारोबार को गति मिलेगी। वहीं दिल्ली व इससे सटे राज्यों में फैक्टरी संचालकों को काफी राहत मिलेगी। इसके लिए सरकार और किसानों का धन्यवाद है। -पीयूष अग्रवाल, उद्यमी
