रायबरेलीः गौ आधारित प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को किया गया जागरूक
रायबरेली। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रागंण में आत्म निभर्र भारत के अन्तगर्त गौ आधारित प्राकृतिक खेती के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री के संबोधन का सजीव प्रसारण किया गया। इस अवसर पर एक कृषक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्यवस्था केन्द्र के सभागार में की गयी। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में …
रायबरेली। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रागंण में आत्म निभर्र भारत के अन्तगर्त गौ आधारित प्राकृतिक खेती के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री के संबोधन का सजीव प्रसारण किया गया। इस अवसर पर एक कृषक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के सजीव प्रसारण की व्यवस्था केन्द्र के सभागार में की गयी। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में गौ आधारित खेती करने वाले कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया। साथ कृषकों को सम्मानित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के उपरान्त गोष्ठी में कृषकों को सम्बोधित करते हुए अध्यक्ष डॉ. नीलमा कुंवर ने कहा गौ आधारित प्राकृतिक खेती देश की आवश्यकता है। हमने खाद्यान्न उत्पादन में महारत प्राप्त कर ली है परन्तु आवश्यकता है भोज्य पदार्थ की गुणवत्ता संरक्षित रखने की। इस अवसर पर जनपद के प्रगतिशील एवं प्राकृतिक खेती करने वाले कृषक शेषपाल सिंह विकासखण्ड शिवगढ़, महीप मिश्रा विकासखण्ड सरेनी, शेखर त्रिपाठी विकासखण्ड सतांव, राम गोपाल सिंह चन्देल एवं किसान सत्य प्रकाश मिश्रा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए सवर्प्रथम देशी गाय, देशी बीज एवं देशी पद्धति की आवश्यकता है।
केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक डा आरपीएन सिंह ने कृषकों से अनुरोध किया कि माननीय प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार करने का समय आ गया है। प्राकृतिक खेती का क्षेत्रफल जनपद में वृद्धि करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर केन्द्र डा एके तिवारी, डा आरके कनौजिया, डा एसवी सिंह एवं डा दीपाली चैहान ने गौ आधारित प्राकृतिक खेती की विस्तृत जानकारी प्रदान किया। गुरुवार को ब्लॉक खीरों के सभागार में गौ आधारित प्राकृतिक खेती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्बोधन के बाद कृषि वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के संबोधन का ऑनलाइन सजीव प्रसारण किया गया।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि देशी गाय का 1.5 किग्रा गोबर,10लीटर मूत्र 180 लीटर पानी मे ड्रम मे 2 किग्रा चने का बेसन 2किग्रा गुड़ डालकर छाया मे रखें । उसे सुबह शाम घड़ी कि चाल मे डंडे से केवल 5 मिनट तक चलाएं। इसका उपयोग एक एकड़ मे 600 लीटर 6 बार प्रयोग करें। बिना रासायनिक खाद के उत्तम पैदावार होती है और रोग एवं बीमारी से मुक्ति भी मिलती है।
यह भी पढ़ें:-अयोध्या: चोरी की 20 बाइकें बरामद, आठ आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
