सीतापुर: आज भी हड़ताल पर रहे बैंक कर्मी, सात सौ करोड़ का लेनदेने प्रभावित
सीतापुर। बैंकों के निजीकरण करने की चल रही सरकारी कवायदों से नाराज बैंक के अधिकारियों, कर्मचारियों ने शुक्रवार को दूसरे दिन भी बैंकों की हड़ताल जारी रखी। बैंकों की यूनियन यूएफबीयू के बैनर तले आज भी सैकड़ों बैंक अफसर व कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। बैंकों की हड़ताल के …
सीतापुर। बैंकों के निजीकरण करने की चल रही सरकारी कवायदों से नाराज बैंक के अधिकारियों, कर्मचारियों ने शुक्रवार को दूसरे दिन भी बैंकों की हड़ताल जारी रखी। बैंकों की यूनियन यूएफबीयू के बैनर तले आज भी सैकड़ों बैंक अफसर व कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। बैंकों की हड़ताल के चलते जिले में करीब सात सौ करोड़ का लेनदेने प्रभावित रहा। किसान, व्यापारियों सहित हर आम-वो-खास बैंकें बंद होने से परेशान रहा।
दूसरे दिन के प्रदर्शन को लेकर बैंक कर्मी इंडियन बैंक के मंडलीय कार्यालय पर एकत्र हुए। यहां यूएफबीयू संगठन के बैनर तले बैंक अफसरों व कर्मियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। हड़ताल कर रहे बैंक कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरपार की लड़ाई का आवाहन किया। इस मौके पर बैंकों के संगठन यूएफबीयू के जिला संयोजक कमलेश कुमार पांडेय ने कहा कि बैंकों के निजीकरण से छोटे किसानों, खुदरा व्यापारियों, स्टार्ट अप उद्यमियों और ठेला, रेहड़ी लगाने वाले असंगठित क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि 1969 में 14 बड़े निजी बैंकों का सरकारीकरण इसी बड़े असंगठित क्षेत्र के सहज सरल वित्तपोषण के लिए किया गया था। सरकारी बैंकों ने राष्ट्रीयकरण के उन तमाम पुनीत उद्येश्यों में अपना भरपूर योगदान दिया। आज भी शून्य धनराशि से जनधन खाते खोलकर चेकबुक और एटीएम जैसी सुविधा दे रहे हैं। स्टैंड अप योजना के तहत दस लाख के ऋण बिना अमानत, जमानत के दे रहे हैं। कोविड काॅल में सरकारी बैंकों ने सभी पटरी, रेहड़ी व्यापारियों को पीएम स्वनिधि योजना में केवल आधार की पहचान पर 10-10 हजार के ऋण दिये।
सार्वजनिक दायित्व निर्वहन के दबाव में निश्चय ही हमारी लाभप्रदता दुष्प्रभावित होती है और घाटे वाला संस्थान बताकर औने-पौने बेचने की साजिश चल रही है। उन्होंने कहा कि हम इसका अंत समय तक विरोध करेंगे। इण्डियन बैंक ऑफिसर ऐसोसिएशन के अंजनि पांडेय ने बताया कि बैंकों की हड़ताल के चलते सीतापुर जिले में करीब सात सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित होगा। शुक्रवार को लेनदेन काफी होता है।
उन्होंने कहा कि बैंकों की हड़ताल 16 व 17 दिसंबर तक थी। इस मौके पर अनुभव मौर्य, लेखराज सिंह, आशुतोष मौर्य, रजनीश शुक्ल, संजय शुक्ल, अभिषेक कुमार पाल, जितेन्द्र मौर्य, संजय कुमार, अनुज, अतुल सक्सेना, सत्य प्रकाश मिश्र, विनय अवस्थी, रंजीत कुमार दास, अनूप कुमार, वीरेन्द्र सिंह, बृजनंदन, नावेद, सर्वेश राठौर, विमलेश कुमार, सुरजीत कुमार, सुनील कुमार, प्रमोद कुमार पाण्डेय, अजीत यादव, मोहित तिवारी, सुशील कुमार आदि सैकड़ो अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
कई जगह एटीएम भी दे गए दगा
बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल के चलते करोड़ों का लेनदेन तो प्रभावित हुआ ही, साथ ही एटीएम के जरिए कैश निकालने वालों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शहर में स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, पंजाब बैंक व यूनियन बैंक आदि के कई एटीएम बूथों में पैसा था। जिससे लोगों ने रुपए निकाल कर अपना काम चलाया, लेकिन कई एटीएम पैसा न होने की वजह से बंद भी थे। कुछ एटीएम में शाम होते-होते कैश खत्म हो गया, जिससे लोगों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ी।
बैंकों में हड़ताल से उपभोक्ता रहे परेशान
कमलापुर। दो दिवसीय बैंकों की हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी लोग परेशान रहे। एटीएम भी कई जगह बंद रहे और जहां खुले मिले तो वहां कतार लग गई। भीड़ बढ़ने के कारण लोगों को आधा आधा घंटा लाइन में लगने के बाद रुपए मिल सके। वहीं शाम को कई एटीएम में नकदी खत्म हो गई तो लोग निराश हुए। बैंक यूनियन के आह्वान पर कस्बे में सेवाएं दे रही भारतीय स्टेट बैंक, आर्यव्रत ग्रामीण बैक, बैंक आफ इंडिया सहित अन्य बैंक दो दिवसीय हड़ताल के चलते बंद रहीं। इनके बंद रहने से कस्बा सहित विकास खण्ड के मानपारा, सुरैंचा, जलालपुर व मास्टरबाग आदि स्थानों पर स्थित बैंकों में लेनदेन करने आए ग्राहकों को परेशान होना पड़ा।
मायूस होकर लौटे बैंक ग्राहक
सकरन। बैंको में हडताल के चलते दूसरे दिन भी कामकाज ठप रहा। दर्जनों ग्राहक बैंक आकर बैरंग वापस लौट गये। दो दिनों से लेनदेन न होने के चलते क्षेत्रीय लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। लगातार दो दिन से बैंकों में चल रही हड़ताल से विकास खंड की सकरन, इटौवा, मदनापुर, सांडा, महाराजनगर, मडोर, खानपुर, रेवान आदि की आर्यावर्त, जिला सहकारी, बैंक आफ बडौदा, स्टेट बैंक आदि शाखाओं में लेन देन न होने के कारण लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुबह से दर्जनों लोग जमा व निकासी के लिये बैंकों को आए, लेकिन हड़ताल के उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
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