बरेली: विवि के शिक्षकों से साइबर ठगी
बरेली, अमृत विचार। साइबर ठग लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। उनके झांसे में आम लोगों के अलावा पढ़े-लिखे लोग भी आ रहे हैं। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ भी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठग ने एक साथ कई शिक्षकों को विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित यूनियन बैंक …
बरेली, अमृत विचार। साइबर ठग लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। उनके झांसे में आम लोगों के अलावा पढ़े-लिखे लोग भी आ रहे हैं। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ भी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठग ने एक साथ कई शिक्षकों को विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित यूनियन बैंक की शाखा का मैनेजर बनकर फोन किया। सभी को बैंक में चल रहे खाते की केवाईसी अपडेट कराने और न कराने पर खाता बंद होने की बात कही।
इसमें वाराणसी में बीएचयू में रिसर्च कर रहे डा. कमला राम बिंद भी हैं, जिनका ठग ने खाता खाली कर दिया। गनीमत रही कि खाते में सिर्फ 4 हजार रुपये ही थे। प्राचीन इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. विजय बहादुर सिंह व शिक्षक संघ के महामंत्री यतिन व उपाध्यक्ष पवन कुमार ने सोमवार को यूनियन बैंक मैनेजर से मामले की शिकायत की और जागरुकता शिविर लगाने की भी मांग की।
प्रो. विजय बहादुर ने बताया कि शनिवार को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर उनके पास फोन आया। उस वक्त वह कार चला रहे थे। फोन करने वाले ने खुद को विश्वविद्यालय परिसर में स्थित यूनियन बैंक शाखा का मैनेजर बताया। इस बैंक में सभी शिक्षकों व कर्मचारियों के खाते हैं। उसने कहा कि केवाईसी अपडेट करनी है। आज आखिरी तारीख है, नहीं तो अकाउंट बंद हो जाएगा। उन्होंने घर जाकर जानकारी देने की बात कही लेकिन उसके बाद उन्होंने जानकारी नहीं दी। इसी तरह से गेस्ट फैकल्टी प्रिया सक्सेना, प्रो. एसबी लाल, डा. पवन कुमार को फोन किया। प्रिया सक्सेना ने आधी कार्रवाई पूरी भी कर ली थी लेकिन ठगी से बच गईं।
इसी समय उसने डा. कमला बिंद को फोन किया। वह भी उस वक्त वाराणसी में कार चला रहे थे। पहले तो उन्होंने जानकारी देने से इंकार कर दिया लेकिन उसने विश्वविद्यालय की बैंक शाखा का मैनेजर बताने के साथ विभाग के शिक्षकों के नाम बताए तो उन्हें भरोसा हो गया और उन्होंने जानकारी दे दी। उसने बैंक खाता, एटीएम डिटेल और मोबाइल की जानकारी ले ली। इसके बाद उनके खाते से 4 हजार रुपये निकाल गए। उनका कहना है कि उनके खाते में इतने ही रुपये थे नहीं तो और रकम निकल सकती थी।
कर्मचारी के खाते से उड़ाए 1.5 लाख
प्रो. विजय बहादुर ने बताया कि जब वह बैंक गए तो मैनेजर ने बताया कि कुछ दिनों पहले विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी के खाते से डेढ़ लाख रुपये निकाल लिए थे। एक विधायक के खाते से भी रुपये निकलते बच गए। अन्य शिक्षकों को भी फोन आए थे लेकिन वह बच गए। उन्होंने बताया कि मैनेजर का कहना है कि शिक्षकों के नंबर विश्वविद्यालय की वेबसाइट से ठग ने लिए होंगे।
मामले की जानकारी की जा रही है। जनवरी में शिक्षकों व कर्मचारियों का एक साइबर जागरुकता शिविर भी लगाया जाएगा। कुछ महीने पहले बरेली कॉलेज में भी इसी तरह से शिक्षकों को फोन किए गए थे। उस वक्त भी परिसर की शाखा का मैनेजर बताया था। इसके बाद शिक्षकों ने बैंक में जाकर शिकायत की थी।
शनिवार और शाम का चुनते हैं समय
साइबर ठग अक्सर शनिवार को बैंक बंद होने या फिर जिस दिन बैंक बंद होते हैं, उस दिन लोगों को ठगी के लिए फोन करते हैं क्योंकि इससे लोग सोचते हैं कि बैंक बंद होगी तो उनका काम कैसे होगा। इसके अलावा ठगी होने पर पीड़ित बैंक में जाकर भी शिकायत नहीं कर पाता है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों को भी शाम 5 बजे से 5:30 बजे तक फोन किए गए।
