यातायात उल्लंघन पर वर्दी का आरक्षण, जानें पूरा मामला…
लखनऊ। कहते हैं कि नियम-कानून सभी के लिए एक बराबर होता है, पर यहां तो नियम-कानून में भी आरक्षण मिलता है। जाति-धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि वर्दी के आधार पर। आम आदमी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करें तो दौड़ाकर फाइन काटा जाता है, पर वर्दीधारकों के लिए तो जैसे मोटर व्हीकल अधिनियम लागू ही …
लखनऊ। कहते हैं कि नियम-कानून सभी के लिए एक बराबर होता है, पर यहां तो नियम-कानून में भी आरक्षण मिलता है। जाति-धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि वर्दी के आधार पर। आम आदमी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करें तो दौड़ाकर फाइन काटा जाता है, पर वर्दीधारकों के लिए तो जैसे मोटर व्हीकल अधिनियम लागू ही नहीं हुआ। जी हां, राजधानी होने के बावजूद लखनऊ में वर्दीधारकों द्वारा यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाती हुई तस्वीर बेहद आम है।
अगस्त 2019 में जारी संशोधित केंद्रीय मोटरयान अधिनियम में वर्दीधारकों के लिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर प्रोग्रेसिव फाइन की लागू किया गया है। जिसके तहत वर्दीधारक सरकारी कर्मचारी के यातायात नियम का उल्लंघन करने पर दो गुना तक फाइन वसूलने की छूट दी गई थी। तत्कालीन डीजीपी ओमप्रकाश सिंह ने गत 8 सितंबर 2019 को इसे लागू भी कर दिया था पर वर्तमान में इसके तहत कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। गत दिनों प्रोग्रेसिव फाइन को बढ़ाकर दो गुना से पांच गुना तक कर दिया गया है। कई राज्यों में इसके तहत कार्रवाई भी हो रही है, पर लखनऊ में अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं।
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कानूनी तौर पर ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य बताया जाता है। पर राजधानी में वर्दी के साथ हेलमेट की कोई अनिवार्यता नहीं है। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर पुलिस कर्मी बिना हेलमेट धारण किये बाइक चलाते दिखते हैं। खुद ट्रैफिक जवान भी बिना हेलमेट के नजर आते हैं, पर अधिकारियों इन्हें लॉ एंड ऑर्डर का पाठ नहीं पढ़ाते।
डीके ठाकुर, पुलिस आयुक्त, लखनऊ ने कहा कि प्रोग्रेसिव फाइन के बारे में जानकारी नहीं है। जानकारी लेने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है। हां अगर पुलिस कर्मी यातायात का उल्लंघन करते हैं तो यह संगीन मामला है। जानकारी मिलने में कड़ी कार्रवाई होगी।
