यूपी चुनाव 2022: बसपा के कैडर वोट पर सभी दलों की नजर, जानें कैसे?
लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2022 जीतने के लिए सभी दल बसपा के कैडर वोटों पर सेंधमारी की तैयारी में जुटे हुए हैं। सपा भी बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जनादेश यात्रा के जरिये दलितों को अपने पक्ष में करना चाह रही है। दलित वोट बैंक में सेंधमारी की शुरुआत भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2014 में शुरू की …
लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2022 जीतने के लिए सभी दल बसपा के कैडर वोटों पर सेंधमारी की तैयारी में जुटे हुए हैं। सपा भी बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जनादेश यात्रा के जरिये दलितों को अपने पक्ष में करना चाह रही है। दलित वोट बैंक में सेंधमारी की शुरुआत भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2014 में शुरू की थी। इस समय हाईकोर्ट के निर्देश पर सपा सरकार ने प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण खत्म कर दिया था।
सपा ने इस आरक्षण का खुला विरोध किया था, जबकि भाजपा इस मुद्दे पर आरक्षण समर्थक की भूमिका में नजर आई थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इसको लेकर दलित वोट बैंक में सेंधमारी शुरू की। भाजपा गैर जाटव दलितों वोटों को अपने पक्ष में लाने पर सफल रही। साथ ही, भाजपा ने गैर यादव वोटरों को भी अपने पक्ष में कर लिया। गैर जाटव व गैर यादव वोटरों के साथ ही हिन्दुत्व कार्ड के बल पर भाजपा ने प्रदेश में सरकार बना ली। बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा अपनी भूल को सुधारकर दलित वोटरों को अपने पक्ष में करना चाह रही है।
बसपा से सपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री लालजी वर्मा व राजअचल अचल राजभर इसमें खास भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा हिन्दुत्व कार्ड, जातीय आधार पर समीकरण साधने के साथ ही गरीबों को निशुल्क राशन देकर वोटरों को पक्ष में करने में लगी है। सपा आंबेडकर संदेश यात्रा के जरिये दलित वोटरों को महंगाई, निजीकरण, बेरोजगारी आदि मुद्दों पर जागरूक कर उन्हें अपने पक्ष करने में करना चाह रही है।
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जातीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी पार्टी के नेताओं केशवदेव मौर्य, डॉ. संजय चौहान, ओम प्रकाश राजभर, राम अचल राजभर, डॉ. राजपाल कश्यप, महेंद्र कुमार गौड़ सहित अलग-अलग जाति के नेताओं को सौंपी गई है। कांग्रेस दलित व पिछड़े वोटरों के खोये जनाधार पर दोबारा पकड़ बनाने के लिए अन्दर ही अंदर जातीय समीकरण साधने में लगी है। पिछले दिनों कांग्रेस ने अपने सदस्यता अभियान की शुरुआत दलित बस्ती से की थी, जबकि जातीय समीकरणों को साधने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर चुके हैं। कांग्रेस अपनी रणनीति के तहत अंदर ही अंदर जातीय समीकरण मजबूत करने में लगी हुई है।
