मुरादाबाद : मनमानी! तुम से जो हो कर लो, नहीं लिखूंगी मुकदमा

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मुरादाबाद, अमृत विचार। दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने गई युवती को महिला थाना प्रभारी ने डांटकर भगा दिया। धमकी दी कि तुम से जो हो कर लो, मैं तुम्हारा मुकदमा दर्ज नहीं करूंगी। पीड़िता पांच दिन लगातार महिला थाने के चक्कर काटती रही मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब परेशान पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस …

मुरादाबाद, अमृत विचार। दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने गई युवती को महिला थाना प्रभारी ने डांटकर भगा दिया। धमकी दी कि तुम से जो हो कर लो, मैं तुम्हारा मुकदमा दर्ज नहीं करूंगी। पीड़िता पांच दिन लगातार महिला थाने के चक्कर काटती रही मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब परेशान पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।

भोजपुर थानाक्षेत्र के गांव काफियाबाद निवासी छाया ने बताया कि उसका विवाह सात मई 2019 को रामपुर जनपद के टांडा थानाक्षेत्र एक गांव निवासी युवक के साथ हुआ था। पीड़िता के अनुसार उसके माता-पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार दान दहेज दिया था। मगर पति, ससुर, सास, देवर और ननद इससे खुश नहीं थे। ससुराल वाले कम दहेज को लेकर उसके साथ मारपीट कर प्रताड़ित करते हैं।

पीड़िता के अनुसार दो अक्टूबर की सुबह करीब नौ बजे पति, सास व ससुर ने मारपीट करके उसे घर से निकाल दिया। धमकी दी कि अपने बाप के घर से एक लाख रुपये और भैंस लेकर आना। वह किसी तरह मायके पहुंची और परिजनों को सारी बात बताई। बेटी का घर बचाने के लिए मायके वाले कई बार पंचायत लेकर उसकी ससुराल गए और उन्हें समझाया मगर वह अपनी जिद पर अड़े रहे। तब पीड़िता 13 दिसंबर को महिला थाने गई और आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी मगर महिला थाना प्रभारी ने उन्हें डांटकर भगा दिया।

पीड़िता के अनुसार वह लगातार पांच दिन तक अपने परिजनों के साथ महिला थाने गई लेकिन, महिला थाना प्रभारी ने साफ कह दिया कि मैं तुम्हारा मुकदमा दर्ज नहीं करूंगी, तुम से जो हो कर लो। पीड़िता का कहना है कि वह मानसिक व आर्थिक रूप से काफी परेशान है। उसने दहेज लोभी ससुराल वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराने के लिए गुरुवार को एसएसपी बबलू कुमार को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

महिला थाना प्रभारी शर्मिला शर्मा ने बताया कि महिला मेरे पास आई थी या नहीं, मुझे याद नहीं है। मैं किसी को मुकदमा दर्ज कराने से मना नहीं करती। हो सकता है महिला का मामला नारी उत्थान केंद्र या अदालत में चल रहा हो। ऐसे में हम कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

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