शाहजहांपुर: तिलहर विधानसभा सीट- अलग है मतदाताओं का मिजाज, हर बार बदलते रहे चेहरे
शशिकांत शुक्ला, निगोही, अमृत विचार। तिलहर विधानसभा सीट पर मतदाताओं का मिजाज कुछ अलग ही है। आजमाए हुए दलों को यहां मतदाता नकार देते हैं और बदलाव पर भरोसा करते हैं। पिछले डेढ़ दशक के चुनाव परिणामों पर गौर करें तो साफ हो जाएगा कि हर बार विधानसभा सीट से दल बदलते रहे। डेढ़ दशक …
शशिकांत शुक्ला, निगोही, अमृत विचार। तिलहर विधानसभा सीट पर मतदाताओं का मिजाज कुछ अलग ही है। आजमाए हुए दलों को यहां मतदाता नकार देते हैं और बदलाव पर भरोसा करते हैं। पिछले डेढ़ दशक के चुनाव परिणामों पर गौर करें तो साफ हो जाएगा कि हर बार विधानसभा सीट से दल बदलते रहे। डेढ़ दशक पहले तिलहर विधानसभा कांग्रेस की परंपरागत सीट हुआ करती थी। बदलते राजनीति समीकरण से अपनी जमीन खोती चली गई।
वर्ष 1957 के पहले विधानसभा चुनाव के बाद वर्ष 1967 से लेकर 1969 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। 1974 में जनसंघ पार्टी से सत्यपाल सिंह यादव को जीत मिली| 1977 में सत्यपाल सिंह कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी बने और जीत गये। हालांकि, इसके बाद वर्ष 1980 और वर्ष 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस सीट पर लगातार हार मिली। वर्ष 1989 के विधानसभा चुनाव मे सुरेंद्र विक्रम सिंह ने सीट फिर से जीतकर कांग्रेस की झोली में डाल दी| 1991 में जनता दल से सत्यपाल सिंह यादव विजयी हुए।
वर्ष 1996 से लेकर 2002 के चुनाव तक कांग्रेस के वीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना सिंह ने कांग्रेस का परचम लहराया। बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच पहली बार सपा को वर्ष 2007 में, बसपा को वर्ष 2012 में और भाजपा को वर्ष 2017 यहां खाता खोलने का मौका मिला। जिले की छह विधानसभा सीटों में से एक तिलहर सीट पर मुकाबला हर बार जोरदार होता है। सीट पर कब्जा जमाने के लिए इस बार भी भाजपा पूरा जोर लगा रही है। वहीं, सपा और बसपा इस सीट को वापस पाने की कोशिश में है। कांग्रेस पार्टी अपना डेढ़ दशक के बाद फिर से खाता खोलने के लिए पूरी तैयारी कर रही है।
बाबूजी और मुन्ना सिंह का बज चुका डंका
बाबूजी के नाम से विख्यात सत्यपाल सिंह यादव 1969 में चुनाव हारने के बाद वर्ष 1974 में पुन: चुनाव मैदान में आ डटे और प्रतिद्वंदी सुरेंद्र विक्रम सिंह को हराकर पहली बार विधायक बने। उन्होंने क्षेत्र में ऐसी पकड़ बनाई कि वह लगातार 1977 में कांग्रेस से, 1980 में जनता पार्टी से, 1985 में लोकदल से विधायक बने। 20 फरवरी 1987 से दिसंबर 1989 तक सत्यपाल सिंह यादव नेता प्रतिपक्ष भी रहे। 1989 में जनतादल से उम्मीदवार रहे सत्यपाल सिंह ने लोकसभा और विधानसभा दोनों सीटों पर चुनाव लड़ा।
वह सांसद सीट जीते, किंतु कांग्रेस के सुरेंद्र विक्रम सिंह ने विधायक सीट पर उन्हें पराजित कर दिया। 1991 के चुनाव में सत्यपाल सिंह ने तिलहर सीट पर विधानसभा और शाहजहांपुर से लोकसभा सीट दोनों पर विजय प्राप्त कर ली। विधायकी से इस्तीफा दे दिया और केंद्रीय राज्यमंत्री के ओहदे पर पहुंच गए। उसके बाद 1993 से 2002 तक चुनावों में कांग्रेस पार्टी के वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना का तिलहर सीट पर कब्जा रहा।
हो चुका पांच बार परिसीमन
2012 में परिसीमन बदला और निगोही क्षेत्र तिलहर सीट में मिला दिया गया, जबकि कटरा खुदागंज मिलाकर कटरा विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। जबकि निगोही से बसपा से विधायक रह चुके रोशनलाल वर्मा ने तिलहर सीट पर पुन: सपा के अनवर अली को हराया। सन 2017 में सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो गया तिलहर विधानसभा की सीट कांग्रेस के पास चली गई| कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद चुनाव में उतरा| वहीं रोशनलाल वर्मा ने भाजपा से चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद को हरा दिया। सन 1952 से अब तक क्षेत्र का पांच बार परिसीमन हो चुका है
एक नजर में….
- सीट का नाम – 133- तिलहर विधानसभा सीट
- कुल मतदाता – करीब 3,54,637
- जिला – शाहजहांपुर
- वर्तमान विधायक – रोशनलाल वर्मा
- पार्टी – भारतीय जनता पार्टी
