मिशन 2022: भाजपा को सता रहा मुस्लिम महिला मतदाताओं का डर, जानें क्यों?
लखनऊ। तीन तलाक पर कानून बनाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लगा था कि कम से कम मुस्लिम महिला मतदाताओं के बीच पार्टी की पैठ बनेगी। इसके अलावा विवाह की उम्र 18 से 21 वर्ष करने के प्रावधान का भी मुस्लिम युवतियों द्वारा सराहे जाने की उम्मीद थी। हालांकि भाजपा नेताओं को अभी …
लखनऊ। तीन तलाक पर कानून बनाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लगा था कि कम से कम मुस्लिम महिला मतदाताओं के बीच पार्टी की पैठ बनेगी। इसके अलावा विवाह की उम्र 18 से 21 वर्ष करने के प्रावधान का भी मुस्लिम युवतियों द्वारा सराहे जाने की उम्मीद थी। हालांकि भाजपा नेताओं को अभी भी संशय है कि इस समर्थन को वह मतों में तब्दील कर पाएंगे। इसी वजह से चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान भाजपा ने महिला मतदाताओं के सत्यापन की मांग की है। हालांकि स्पष्ट तौर मुस्लिम महिलाओं से इसकी संबद्धता की पुष्टि भाजपा नेता नहीं करते।
वैसे यह कोई पहली बार नहीं है। चुनाव के दौरान महिला मतदाताओं के सत्यापन का मामला और मतदान केंद्रों पर महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की शिकायत पार्टी कई बार कर चुकी है। पार्टी ने प. बंगाल, असम, केरल और बिहार के चुनाव के दौरान भी निर्वाचन आयोग से इस तरह की मांग की थी। उस दौरान निर्वाचन आयोग ने इस मांग को अनसुना कर दिया था। अब एक बार प्रदेश के विधानसभा चुनावों के करीब आते ही यह मामला जोर पकड़ने लगा है।
मंगलवार को निर्वाचन आयोग के समक्ष दिए गए सुझावों में भाजपा ने महिला मतदाताओं के सत्यापन की मांग की है, उसे मुस्लिम महिला मतदाताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनावों के दौरान पोलिंग बूथों पर मुस्लिम महिलाओं के बुरके में चेहरा ढका होने को लेकर पीठासीन अधिकारियों से भाजपा कार्यकर्ताओं की तीखी नोकझोंक भी आम बात है।
उस दौरान मुस्लिम महिलाओं का चेहरा बुरके से ढका होने की वजह से पोलिंग एजेंट मतदाता का सत्यापन नहीं कर पाते। जिसकी वजह से बोगस वोटिंग की आशंका पार्टी के स्थानीय नेताओं द्वारा जताई जाती रही है। शायद इसी वजह से भाजपा ने एक बार फिर इस मुद्दे को उछालते हुए सभी बूथ पर महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की बात कही है। जिससे किसी महिला मतदाता की पहचान का सत्यापन किया जा सके।
वहीं, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े वरिष्ठ नेता सुहैल इलियासी ऐसी किसी आशंका से इंकार करते हुए कहते हैं कि भाजपा को सभी वर्गों का समर्थन मिल रहा है। केंद्र व प्रदेश सरकार के कामकाज से सभी लोग संतुष्ट हैं। पार्टी को पिछली बार के मुकाबले इस बार मुस्लिम महिलाओं के ज्यादा वोट हासिल होगे।
महिला मतदाताओं को रिझा रहा मुस्लिम मंच
संघ के अनुषांगिक संगठन राष्टीय मुस्लिम मंच ने पिछले दिनों अभियान चलाकर तीन तलाक कानून के बारे में जागरूकता अभियान चलाया है। अभियान के तहत तलाकशुदा महिलाओं को इस कानून के फायदे बताए गए हैं। इसी प्रकार विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करने के फैसले के बारे भी रायशुमारी की गई है। मुस्लिम वर्ग की महिलाओं के बीच कार्यक्रम कर मुस्लिम मंच ने इन दोनों कानूनों से होने वाले लाभ के बारे में बताया है।
मुस्लिम मंच से जुड़े तौहीद खान कहते हैं कि इन दोनों कानूनों से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को सबसे ज्यादा लाभ होता है। वह इस अभियान को जागरूकता अभियान बताते हुए कहते है कि इसका चुनाव से कोई लेनादेना नहीं। यह दोनों मुद्दे मुस्लिम महिलाओं के भाजपा के पक्ष में मतदान में कितने मददगार होंगे, इस पर वह कोई उत्तर नहीं देते।
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