लखनऊ: एफआईआर दर्ज होने के तीन दिन बाद भी पदों पर काबिज अधिकारी, जानें मामला

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लखनऊ। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियत्रंक समेत चार लोगों पर गंभीर अरोपों में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अभी तक उन्हें पदों से नहीं हटाया गया है, ऐसे में पुलिस की जांच को वह प्रभावित कर सकते हैं। ये आरोप विश्वविद्यालय की महिला सहायक कुलसचिव की ओर से …

लखनऊ। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियत्रंक समेत चार लोगों पर गंभीर अरोपों में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी अभी तक उन्हें पदों से नहीं हटाया गया है, ऐसे में पुलिस की जांच को वह प्रभावित कर सकते हैं। ये आरोप विश्वविद्यालय की महिला सहायक कुलसचिव की ओर से लगाये गये हैं। सहायक कुलसचिव बिंदू त्रिपाठी का कहना है कि अधिकारियों की टीम उनके खिलाफ है, कुलपति भी मामले को अनदेखा कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जब तक अधिकारी पद पर रहेंगे निष्पक्ष जांच नहीं हो पायेगी। बता दें कि बिंदू ​त्रिपाठी की ओर से तीन दिन पहले विश्वविद्यालय के कुलसचिव अमित कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ अमित कुमार राय, प्रोफेसर हिमांशु झा और डॉ अरविंद कुमार पर छेड़छाड़ समेत गंभीर गंभीर आरोप लगाते हुए पारा थाने में एफआईआर दर्ज करायी गयी है। पुलिस ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।

गलत है परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति

बिन्दू त्रिपाठी ने कहा कि कुल सचिव अमित सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमित कुमार राय, प्रो. हिमाशु झा और डॉ. अरविन्द एक गैंग के रूप में काम करते हैं। इनके चेहरे बेनकाब होने लगे तो हमारे ऊपर गलत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुल सचिव अपने एजेंट के रूप में परीक्षा नियंत्रक लेकर आए हैं। परीक्षा नियंत्रक की नियुक्त गलत हुई है। उनके पास कोई एकेडमिक योग्यता व अनुभव नहीं है। साथ ही काफी कम समय में उन्हें कुल सचिव ने आर्थिक लाभ भी पहुंचाया है। वह परीक्षा विभाग का काम कम कुल सचिव के हितों की रक्षा अधिक करते हैं।

गर्वनर ने हमारी नियुक्त को वैध ठहराया है

सहायक कुल सचिव बिन्दू त्रिपाठी ने परीक्षा नियंत्रक की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि परीक्षा नियंत्रक बताए कि हमारी नियुक्त पर जांच के लिए किसने आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन गर्वनर ने उनकी नियुक्त को जांच के बाद वैध ठहराया है। यह लोग विवि में सभी कर्मचारियों को उनकी नौकरी की जांच की बात कहेे कर आतंकित करते हैं। बिन्दू ने बताया कि वह जिस आवास में रहती हैं, उसे विवि ने उन्हें आवंटित किया है। उसके लिए एचआरए कटता है।

मामला मेरे संज्ञान में आया था, इसकी जांच के लिए मैने कमेटी ​गठित कर दी थी, जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना एफआईआर दर्ज करायी गयी है, ​फिर भी कोई बात नहीं है, अब पुलिस अपनी रिपोर्ट देगी, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी। फिलहाल विश्वविद्यालय में सभी अधिकारियों से जवाब मांगा गया है…राणा कृष्णपाल सिंह कुलपति पुनर्वास विश्वविद्यालय।

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