रायबरेली में नहीं रहा कांग्रेस का एक भी विधायक, अब जिले में लंबी पारी के लिए तैयार बीजेपी

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

रायबरेली। गांधी, नेहरू परिवार के लिए रायबरेली की सियासी जमीन हमेशा से मुफीद रही। जब-जब कांग्रेस पर संक्रमणकाल आया। रायबरेली से पार्टी को हौसला मिला और सत्ता में वापसी की ताकत मिली। पहली बार रायबरेली के इतिहास में कांग्रेस घर में ही बोल्ड हो गई है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए घर …

रायबरेली। गांधी, नेहरू परिवार के लिए रायबरेली की सियासी जमीन हमेशा से मुफीद रही। जब-जब कांग्रेस पर संक्रमणकाल आया। रायबरेली से पार्टी को हौसला मिला और सत्ता में वापसी की ताकत मिली।

पहली बार रायबरेली के इतिहास में कांग्रेस घर में ही बोल्ड हो गई है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए घर को बचाने की बड़ी चुनौती होगी। भाजपा के थिंकटैंक ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है। दो विधायक जो कांग्रेस से जीते लेकिन बागी हो गए और चार साल के भीतर कांग्रेस के दोनों विधायक भाजपा के हो गए वहीं एमएलसी और जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा का कमल थामे हुए हैं। यह भाजपा के लिए अब तक की बड़ी उपलब्धि है और इसी के सहारे वह रायबरेली में लंबी पारी खेलने का मैदान तैयार कर रही है।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब आए तो उनके मुख्य निशाने पर कांग्रेस रही। कारण कांग्रेस का यह गढ़ भाजपा कभी हासिल नहीं कर सकी थी। यहां तक की आपातकाल में भी रायबरेली कांग्रेस की रही थी। पहली बार कांग्रेस घर में साफ हो गई।

यही कारण रहा कि मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साध संस्कृति और विचारधारा की बात की। राम, कृष्ण को न मानने के कारण कांग्रेस का ऐसा हाल होने की बात कही। वहीं सपा पर भी वार किया लेकिन वह अखिलेश यादव तक ही सीमित रहा। अब जो हालात हैं वह कांग्रेस के लिए चिंता का सबब हैं।

पढ़ें- बरेली: नए साल की शुरूआत, अच्छे मौसम के साथ, सुबह से खिली धूप ने लोगों को पहुंचाई राहत

एमएलसी की नाराजगी से कांग्रेस का बिगड़ा खेल

2017 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो एमएलसी दिनेश सिंह अपने भाई राकेश सिंह को टिकट दिलाने के लिए जुट गए जबकि पार्टी का एक खेमा इससे नाराज था। वहीं एमएलसी के चुनाव में भी कांग्रेस का एक धड़ा दिनेश सिंह के खिलाफ लेकिन उसके बाद भी दिनेश को टिकट मिली और वह जीत गए। लेकिन एक लैटर चर्चा का विषय बन गया।

बताते हैं कि दस जनपथ से यह लैटर जारी हुआ था। उसके बाद दिनेश सिंह ने किसी तरह अपने भाई को विधायक बनवा लिया लेकिन टीस बरकरार रही और अप्रैल 2017 में वह भाजपा के साथ हो गए। उसी के बाद कांग्रेस में टूटन शुरू हो गई और कोरोनाकाल के दौरान सदर विधायक अदिति सिंह प्रियंका गांधी के खिलाफ हमलावर हो गईं।

इसी के बाद कांग्रेस की जमीन खिसकती गई। हालांकि थिंकटैंक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा यह है कि अमेठी के बाद कांग्रेस का दूसरा घर रायबरेली भी छिटक गया है।

संबंधित समाचार