प्रधानमंत्री मोदी को अपने खेत का केला खिलाना चाहते हैं किसान धरम चंद, जानें वजह

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लखनऊ। बक्शी का तालाब के गांव पृथ्वीपुर के किसान धरम चंद केले की खेती करते हैं और नवनी ब्रांड के नाम केले से बेचते हैं। शनिवार को प्रधानमंत्री से वचुअल संवाद करने के दौरान वह बोले कि सर, मेरी इच्छा आपको केला खिलाने की है, मुझे एक बार आप जरूर बुलाइए। प्रधानमंत्री ने उनको आश्वस्त …

लखनऊ। बक्शी का तालाब के गांव पृथ्वीपुर के किसान धरम चंद केले की खेती करते हैं और नवनी ब्रांड के नाम केले से बेचते हैं। शनिवार को प्रधानमंत्री से वचुअल संवाद करने के दौरान वह बोले कि सर, मेरी इच्छा आपको केला खिलाने की है, मुझे एक बार आप जरूर बुलाइए। प्रधानमंत्री ने उनको आश्वस्त किया कि मौका मिलेगा तो जरूर तुम्हारे खेत के केले खाऊंगा।

शनिवार को प्रधानमंत्री ने देशभर के 10 किसानों से वर्चुअल संवाद किया। इसी संवाद में बक्शी तालाब के गांव चक पृथ्वीपुर के किसान धरम चंद अपने 40 अन्य किसान साथियों के साथ कलेक्ट्रेट के एनआइसी कक्ष पहुंचे। यहां दोपहर 12:30 बजे से दो बजे तक प्रधानमंत्री के साथ उनका संवाद हुआ। हालांकि महज चार मिनट के संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धरमचंद का नाम पूछा और कहा कि तुमने एफपीओ कैसे बनाई।

धरमचंद ने बताया कि वर्ष 2015 में किसान प्रोड्यूसर कंपनी बनाकर 1034 किसानों को अपने साथ जोड़ा और नवीन किसान प्रोड्यूसर कंपनी बनाई। स्माल फारमर्स एग्रीकल्चर कंसोरियम ने मेरी कंपनी की 2.19 लाख रुपये की मदद की। कुल 5.38 लाख रुपये से केला, आम, आलू व सब्जियों को बोना शुरू कर दिया। वर्ष 2020-21 में कंपनी का टर्नओवर 35.32 लाख रुपये पहुंच गया है।

जब उनकी कंपनी के किसानों ने पीएम का अभिवादन किया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लखनऊ के किसानों के चेहरे पर खुशी देख मैं बहुत प्रसन्न हूं।इस दौरान उनके साथ केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजबीर सिंह, जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश, मुख्य विकास अधिकारी अश्विनी कुमार पांडेय, कृषि निदेशक विवेक कुमार और जिला कृषि अधिकारी ओपी मिश्रा के अलावा कई अधिकारी मौजूद थे।

केले की खेती से प्रतिमाह 90 हजार की आमदनी

धरमचंद ने बताया कि तीन एकड़ में केले व आलू की मुख्य रूप से खेती करते हैं। मुंबई से केले के पौधे लाते हैं और फिर उनकी रोपाई करते हैं। महीने के हिसाब से जोड़े तो मुझे खेत के अनुरूप 80 से 90 हजार रुपये महीने की आमदनी हो जाती है। कंपनी से जुड़े सभी किसानों को उनके खेत के अनुरूप आमदनी होती है।

ई-नाम पोर्टल से जुड़ी है कंपनीः ध्ररमचंद बताते हैं कि नवीन किसान प्रोड्यूसर कंपनी ई-नाम पोर्टल से जोड़ा है जिससे हर मंडी में रेट का पता चल जाता है। जहां ज्यादा दाम मिलता है वहीं अपना सामान बेचते हैं। लोकल फार वोकल को बढ़ावा देने के लिए किसानों ने पैदा होने वाले केले का नाम नवनी केला ब्रांड रखा है। इसी के नाम से केले का कारोबार करते हैं।

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