संभल: कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने जा रहे किसानों को रोका, नोकझोंक

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संभल, अमृत विचार। जनपद में बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में भाकियू टिकैत के कार्यकर्ता सोमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करने जा रहे थे, प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस पर किसान भड़क गए। उनकी पुलिस के आला अधिकारियों से नोकझोंक हो गई। किसानों के रुख को भांपते हुए बाद में पुलिस …

संभल, अमृत विचार। जनपद में बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में भाकियू टिकैत के कार्यकर्ता सोमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करने जा रहे थे, प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस पर किसान भड़क गए। उनकी पुलिस के आला अधिकारियों से नोकझोंक हो गई। किसानों के रुख को भांपते हुए बाद में पुलिस प्रशासन को बैरिकेडिंग हटानी पड़ी। इसके बाद किसान नेताओं ने जिलाधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। बाद में जिलाधिकारी से आश्वासन मिलने पर किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।

सोमवार को बहजोई के बड़े मैदान में भारतीय किसान यूनियन टिकैत के कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। धरने को संबोधित भाकियू के महासचिव चौधरी विरेंद्रा ने कहा की भाकियू टिकैत के कार्यकर्ता दिल्ली बार्डर में सरकार के खिलाफ चल रहे धरना प्रदर्शन में व्यस्त थे। इस कारण जिले के अधिकारियों ने किसानों के साथ लूट मचा दी, जिसके विरोध में वह जिलाधिकारी से बात करने आए थे, जहां पुलिस ने उन्हें अंदर जाने से रोक लिया। बड़े मैदान में चल रहे धरने में निर्णय लिया गया कि अब धरना जिलाधिकारी के कार्यालय के बाहर ही होगा। इस पर सभी किसान जिलाधिकारी के कार्यालय की तरफ चल दिये।

पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा दी। गुस्साए किसानों ने बैरिकेडिंग को हटाने की कोशिश की। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने समझाया लेकिन भड़के किसान नहीं माने और जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर पहुंच कर चकबंदी, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग और बैंक कर्मचारियों के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस पर जिला अधिकारी संजीव रंजन ने किसान नेताओं को अंदर बुलाकर बात करने के लिए कहा। किसान नेताओं ने जिला अधिकारी को बताया कि चकबंदी विभाग, स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार चरम है। इसके विरोध व किसानों के हक की लड़ाई लड़ने को उन्हें मजबूर होकर धरने पर बैठना पड़ रहा है।

अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई है। गांव उधरनपुर अजमत नगर में काफी समय से चकबंदी कार्य चल रहा है, जिससे जो कि अब तक पूरा नहीं किया गया है। बिजली विभाग की ओर से किसानों को समय से विद्युत आपूर्ति न मिलने से फसल सूख जाती है और व यूनिट से ज्यादा बिल किसानों से वसूला जाता है। पुलिस भी किसानों को प्रताड़ित कर रही है। जिले में किसानों का शोषण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि जल्दी ही सारी मांगें मान ली जाएंगी और भ्रष्टाचार की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। किसान नेताओं ने जिलाधिकारी की बात पर भरोसा कर धरना समाप्त कर दिया।

समस्या का समाधान होने के बाद ही घर जाएंगे किसान : जयवीर यादव
भारतीय किसान यूनियन असली अराजनैतिक के कार्यकर्ता और क्षेत्र के किसान बहजोई में स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय के पास में स्थित बड़े मैदान में सात सूत्रीय मांगों को लेकर आठ दिनों से धरना पर डटे हुए हैं। सोमवार को धरना को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह यादव ने कहा कि जब तक जिले के प्रशासनिक अधिकारी किसानों की मांगे नहीं मानते हैं तब तक किसान धरना पर डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसान आज के समय में निराश्रित गोवंश से पूरी तरह से परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायत राज, स्वास्थ्य विभाग, चकबंदी विभाग, विद्युत विभाग और राजस्व विभाग की ओर से किसानों का शोषण किया जा रहा है। विद्युत आपूर्ति, किसानों की भूमि पर भू माफिया के अवैध कब्जे, यारावीरा फर्टिलाइजर के दूषित पानी से किसानों को परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। पंचायत में वक्ताओं ने प्रशासन की उदासीनता की घोर निंदा की। पंचायत में वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आश्वासन देकर आंदोलन रद्द कर किसानों को सर्दी का बहाना देकर घर भेज देना चाहता है, जो कतई मुमकिन नहीं है।

किसान अपनी समस्याओं को लेकर जिला अधिकारी कार्यालय पर आए हैं, वह यहां से अपनी समस्याओं का समाधान लेकर ही वापस जाएंगे। इस दौरान मुशाहिद, दिलशाद, महमूद, अनीस, साबिर खान, बाबूराम प्रजापति, मुन्नालाल, सुरेंद्र सिंह, ब्रह्म सिंह, आसिफ खान, राजपाल, शाहिद तुर्की, अर्जुन सिंह, गंगाफल, कुंवरपाल सिंह यादव आदि किसान शामिल रहे।

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