रामपुर : कभी थी औद्योगिक क्रांति, आज रोजगार को तरसते हैं युवा

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अखिलेश शर्मा/रामपुर, अमृत विचार। रियासत के दौर में रामपुर में आई औद्योगिक क्रांति ने आजादी के बाद तक यहां जलवा कायम रखा। चिमनियों से निकलता धुआं और फैक्ट्री के साइरनों की आवाज पर हजारों कर्मचारी ड्यूटी पर जाते थे, वहीं घरों में चूल्हे भी साइरनों की आवाज पर जला करते थे। 1990 आते-आते यहां सब …

अखिलेश शर्मा/रामपुर, अमृत विचार। रियासत के दौर में रामपुर में आई औद्योगिक क्रांति ने आजादी के बाद तक यहां जलवा कायम रखा। चिमनियों से निकलता धुआं और फैक्ट्री के साइरनों की आवाज पर हजारों कर्मचारी ड्यूटी पर जाते थे, वहीं घरों में चूल्हे भी साइरनों की आवाज पर जला करते थे। 1990 आते-आते यहां सब वीरान हो गया। रामपुर की औद्योगिक क्रांति विनाश की ओर अग्रसर हो गई। एक-एक करके करीब पचास छोटे-बड़े उद्योग बंद हो गये। आज खंडहर के रूप में पड़ी वीरान फैक्ट्रियां पुरानी यादें ताजा कर देती हैं।

रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खां के दौर में रामपुर में औद्योगिक क्रांति आई। इस दौरान यहां करीब 50 फैक्ट्रियां लगाई गईं। दिल्ली के एक अंग्रेज उद्योगपति ग्रांट गोवन रेमंड ने उनके आग्रह पर 20 जनवरी 1933 को रजा चीनी मिल लगवाई। इसके बाद सात फरवरी 1936 को रजा बुलंद फैक्ट्री लगी। साथ ही रजा टैक्सटाइल, रामपुर डिस्टिलरी आदि फैक्ट्रियों की स्थापना हुई। लेकिन, बाद में अधिकतर फैक्ट्रियां बंद होती चली गईं। रामपुर डिस्टिलरी ही ऐसी फैक्ट्री है, जो आज भी प्रगति की राह पर है। इस फैक्ट्री ने इतनी तरक्की की है कि रोजाना 20 करोड़ टैक्स सरकार को दे रही है। ब्रिटिश फौज को जरूरी सामानों की आपूर्ति करने के लिए यहां उद्योग लगाए गए।

इंडस्ट्रीयल बोर्ड बनाया : नवाब रजा अली खान ने घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए इंडस्ट्रीयल बोर्ड बनाया था। इस बोर्ड में एक लाख रुपये आरक्षित किए गए। इस रकम से उद्यमियों की मदद की गई। 11 जुलाई 1932 को इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की रामपुर में स्थापना हुई। रियासत ने बैंक को इमारत और बिजली मुफ्त में दी। साथ ही तीन लाख रुपये 16 वर्ष के लिए केवल मात्र एक फीसद ब्याज पर फिक्स डिपॉजिट किए। 1938 में यहां रजा टेक्सटाइल की स्थापना की गई। इसके बाद रामपुर में कारखानों की होड़ लग गई और कानपुर के बाद यूपी का सबसे बड़ा उद्योग केंद्र बन गया। रामपुर में लगे कारखानों में 1972 तक 6023 कर्मचारी कार्यरत थे। रजा शुगर मिल में 1168 और रजा टेक्सटाइल में 2532 काम करते थे। उस दौर में कुल 33 उद्योग लगे। 1942 में 50 लाख की लागत से रामपुर डिस्टिलरी लगी।

कभी मुद्दा नहीं बनते बंद उद्योग: जिले में चाहे लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा का, न तो उद्योग धंधे कभी मुद्दा बने और न बेरोजगारी। यह हालात तब है जब यहां रोजगार को तरसते युवा पलायन को मजबूर हैं। दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र के साथ ही गुजरात में भी जाकर नौकरियां, मेहनत मजदूरी तक कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चला रही है। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और बेरोजगारी की समस्या भी दूर होगी। हालांकि अभी उद्योगों को और सहूलियत दिए जाने की जरूरत है। मैंथा पर मंडी शुल्क पूरी तरह हटाया जाना चाहिए। – श्रीष गुप्ता, सचिव इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

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