HC ने विकास निकाय को दिया निर्देश- लोनार झील को आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित कराने के लिए प्राधिकरण का करें रुख
नागपुर, महाराष्ट्र। बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने अदालत द्वारा गठित विकास निकाय को, लोनार क्रेटर झील को महाराष्ट्र में आर्द्रभूमि अधिसूचित कराने और उसका संरक्षण तथा सतत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आर्द्रभूमि प्राधिकरण का रुख करने का निर्देश दिया है। बुलढाणा जिले के लोनार शहर में स्थित यह झील 50,000 से अधिक …
नागपुर, महाराष्ट्र। बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने अदालत द्वारा गठित विकास निकाय को, लोनार क्रेटर झील को महाराष्ट्र में आर्द्रभूमि अधिसूचित कराने और उसका संरक्षण तथा सतत प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आर्द्रभूमि प्राधिकरण का रुख करने का निर्देश दिया है। बुलढाणा जिले के लोनार शहर में स्थित यह झील 50,000 से अधिक साल पहले, उल्कापिंड के असर के कारण बनी थी।
उच्च न्यायालय ने पिछले साल राज्य सरकार को इस जलाशय के संरक्षण के लिए ‘लोनार क्रेटर झील विकास प्राधिकरण’ गठित करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल पंसारे की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को कीर्ति निपांकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति से लोनार क्रेटर झील को आर्द्रभूमि अधिसूचित कराने के लिए आर्द्रभूमि प्राधिकरण का रुख करने को कहा।
याचिकाकर्ता ने झील के पानी के रंग में बदलाव और उसके संरक्षण को लेकर चिंता जतायी है। आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित किए जाने से इस झील के बेहतर संरक्षण और सुरक्षा में मदद मिलेगी। अंडाकार लोनार झील एक मशहूर पर्यटक स्थल है और दुनियाभर से वैज्ञानिक यहां अनुसंधान के सिलसिले में आते हैं। यह झील 2020 में तब सुर्खियों में आयी जब इसके पानी का रंग गुलाबी हो गया, जिसने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों को भी स्तब्ध कर दिया।
ये भी पढ़े-
गोवा में राज्यपाल से मिले भाजपा नेता, बोले- बर्खास्त की जाए पंजाब सरकार
