कांग्रेस में साढ़े तीन दशक का सूखा खत्म करने की बेचैनी
महेंद्र सिंह/अमृत विचार। देश की पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का ठाकुरद्वार विधान सभा सीट पर लंबे समय तक कब्जा रहा। मगर, समय के साथ इस सीट पर पार्टी का जनाधार खत्म होता चला गया। नतीजन पार्टी साढ़े तीन दशक से यहां खाता तक नहीं खोल पाई। जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित ठाकुरद्वारा …
महेंद्र सिंह/अमृत विचार। देश की पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का ठाकुरद्वार विधान सभा सीट पर लंबे समय तक कब्जा रहा। मगर, समय के साथ इस सीट पर पार्टी का जनाधार खत्म होता चला गया। नतीजन पार्टी साढ़े तीन दशक से यहां खाता तक नहीं खोल पाई।
जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित ठाकुरद्वारा में विधान सभा चुनावों की बात की जाए तो इस सीट पर अब तक के चुनाव में छह बार कांग्रेस ने परचम लहराया है। पांच बार इस सीट पर कमल खिला है, जबकि दो बार सपा, दो बार बसपा और दो बार अन्य दलों के प्रत्याशी जीते हैं। यह सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी।
1952 1957 व 1962 में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। इसके बाद जनता ने कांग्रेस की और से मुंह मोड़ लिया। 1967 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी से ए खान विधायक चुने गए। 1974 में फिर जनता का रुख कांग्रेस की तरफ हुआ और रामपाल सिंह को विधायक चुना। 1980-85 में भी कांग्रेस का ही कब्जा रहा। उसके बाद पार्टी के विजय रथ को ऐसी लगाम लगी कि यहां उसका किला पूरी तरह ध्वस्त हो गया। आजादी के बाद से हुए विधानसभा चुनावों में शुरुआत के दौर में कांग्रेस ने जमकर दमखम दिखाया।
वर्तमान विधायक भी रह चुके हैं कांग्रेसी
क्षेत्र के सपा विधायक नवाब जान भी कांग्रेसी रह चुके हैं। 2012 के चुनाव में भाजपा के सर्वेश कुमार ने परचम लहराया। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मुरादाबाद सीट से सासंद का टिकट दे दिया। जनता ने भी उन्हें समर्थन दिया और लोक सभा पहुंचा दिया। उनके सांसद बनने के बाद यह सीट रिक्त हो गई। 2014 में उपचुनाव हुए, जिसमें सपा ने नवाब जान और भाजपा ने राजपाल सिंह पर दांव खेला। मगर, दोबारा यहां कमल नहीं खिल सका और सपा ने बाजी मार ली। नवाब जान ठाकुरद्वारा नगरपालिका के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वह कांग्रेस में भी रह चुके हैं।

