फतेहपुर बना ‘उहापोह’ का शिकार, अभी तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाए राजनीतिक दल
फतेहपुर। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अभी तक उहापोह की स्थिति है। शायद ये ही कारण है कि राजनीतिक दलों ने अब तक फतेहपुर जिले के प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। सभी दल जिताऊ प्रत्याशी की तलाश को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। दिलचस्प बात यह भी है …
फतेहपुर। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अभी तक उहापोह की स्थिति है। शायद ये ही कारण है कि राजनीतिक दलों ने अब तक फतेहपुर जिले के प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। सभी दल जिताऊ प्रत्याशी की तलाश को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। दिलचस्प बात यह भी है की सिटिंग विधायकों के भी नाम प्रत्याशी के रूप में अभी तक घोषित नहीं किए गए हैं, इससे चर्चाओं का बाजार तेज हो गया है।
छह में से पांच सीटों पर है बीजेपी का कब्जा
बता दें कि जिले की 6 विधानसभा सीटों में से जहानाबाद को छोड़कर सभी पर अभी तक भाजपा के ही विधायक हैं। जहानाबाद में भी भाजपा के सहयोगी संगठन अपना दल का कब्जा है। अब जब चुनाव आयोग ने यूपी चुनाव की घोषणा कर दी है तो सभी राजनैतिक दल जिताऊ और टिकाऊ प्रत्याशी की तलाश में माथापच्ची कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि भाजपा भी सभी दावेदारों के नाम पर विचार कर रही है, जिससे यह लगता है कि भाजपा सिटिंग विधायक को ही टिकट के फार्मूले पर न चलकर आवश्यक परिवर्तन की नीति पर काम कर रही है।
सदर विधानसभा सीट के मतदाता नाखुश
गौरतलब है कि जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र से बसपा प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक आदित्य पांडे का नाम तो औपचारिक रूप से घोषित किया जा चुका है, लेकिन अन्य दल अभी भी चुप्पी साधे हुए हैं। अन्य दल अभी तक निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंच सके हैं। वहीं सदर विधानसभा सीट में भी मतदाता वर्तमान विधायक से खासे असंतुष्ट चल रहे हैं। जमीनों पर अवैध कब्जे, खनन और निरंकुश भ्रष्ट प्रशासन के चलते जनता में काफी नाराजगी है। यही हाल बिंदकी विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है।
पिछली बार पीएम मोदी के चेहरे पर मिली थी बड़ी जीत
सूत्रों की मानें तो जहां वर्तमान विधायक की छवि को लेकर उनके ही दल में सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं विधायक की निष्क्रियता उनके कार्यों द्वारा अवैध कब्जा आदि को लेकर आम मतदाता की बात तो दूर स्वयं भाजपा संगठन के ही लोग उनके विरोध में दिख रहे हैं। शायद ये ही कारण है कि लगभग दो दर्जन दावेदार जोर आजमाइश करने में जुटे हैं। बता दें कि पिछले चुनाव में भाजपा को जो विजयश्री हासिल हुई थी वह नरेंद्र मोदी की छवि और उनकी लोकप्रियता का परिणाम था। इस बार भी भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभामंडल से आस लगाए बैठी है।
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टिकट फाइनल न होने से बढ़ रहे दावेदारों के खर्चे
खागा, हुसैनगंज, अयाह शाह, फतेहपुर सदर, बिंदकी व जहानाबाद में सभी दलों के दावेदार प्रत्याशियों ने चुनावी प्रचार शुरू किया लेकिन अभी तक टिकट फाइनल ना होने से उनके खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी अभी तक अपने प्रत्याशियों को घोषित करने का साहस नहीं दिखाया है।
जमीनी हालात ये हैं सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों की छवि आम जनमानस में इतनी बेहतर नहीं है, जितनी अपेक्षा थी। मतदाताओं में उनके प्रति असंतोष है और उनका मानना है कि अपेक्षित विकास तो हुआ ही नहीं, भ्रष्टाचार और माफिया राज से भी उन्हें मुक्ति नहीं मिली है। भाजपा प्रत्याशी जहां राष्ट्रीय नेताओं की छवि को भुनाने के लिए तैयार बैठे हैं वहीं अन्य विपक्षी दल भाजपा के प्रति नाराजगी का लाभ लेने के लिए लगातार सक्रिय हैं।
